तेरी रहमत का मुझको कोई गिला नहीं है ये खुदा !
तेरे अंदाजे ब्यान के तो कायल हैं हम सभी पर !
तेरे इतने करीब होके भी तुझसे इतने दूर क्यु हैं हम !
तेरी इस हसीं अदा से आज भी वाकिफ क्यु नहीं है हम !
ये जानते हुए की सब कुच्छ तेरे रहमो कर्म पे है !
फिर क्यु आपस में ही लड़ झगड़ रहे हैं हम !
इसका एहसास तू सबको करा दे ये मेरे मालिक !
तेरे ही बनाये बन्दों में अकाल की थोड़ी कमी सी क्यु है
मंजिल
जानते नहीं थे अभी तक अपनी मंजिल का पता हम !
घर से निकले तो रास्तो ने मिन्जिल का पता बता दिया !
अब लोट कर तो न आना चाहते थे हम वापस ये दोस्त !
पर रिश्तो के दर्द ने हमे फिर से अपने पास बुला लिया !
ये जिंदगी क्यों रंग देखती रहती है तू हर पल मुझको !
क्या आजकल तुझसे भी मेरी ये ख़ुशी देखि नहीं जाती !
अब तो तू बख्श दे मुझको मेरे हाल पे ये मेरे सनम !
न जाने किस मोड़ पर जिंदगी की शाम ढल जाये !
न आ पाएंगे फिर तेरी आगोश में लोट कर के हम !
इतना तो करम करदे मुझे बख्श दे सनम !
सम्पूर्ण मनुष्य
अपने जीवन के अभी तक के सफ़र में मैने पाया की एक इन्सान में वो सारी खुबिया मोजुद हैं जो वो दुसरो में देख कर खुश होता है !तभी तो इसे महसूस भी करता है ओर उस जेसा बनने की कोशिश भी करता है ! इसके बावजूद हर इन्सान ने न चाहते हुए भी अपनी एक सीमा तय कर रखी है ! उसने अपने अन्दर से सिर्फ उसी खूबी को बहार आने दिया है जिसका जवाब वो आसानी से दे सके , और उस बारे में उससे कोई सवाल न उठा सके ! बाकि सभी खूबियों को वो अपने अन्दर ही समेटे हुए है उसका आनद तो लेना चाहता है पर कुच्छ समाज के डर और कुच्छ अपने वेक्तित्व के डर से उसे दुसरो के सामने प्रकट नहीं होने देता ! कयोकी वह इसके अंजाम से अच्छी तरह वाकिफ हैं पर उसकी चाहत इन्सान को चेन से रहने भी नहीं देती और वो इस संसार रूपी भीड़ में उसे तलाशता रहता है !किसी एसे इन्सान को जो उसकी भावनाओ को समझ सके उसकी हिम्मत को बड़ा सके और उसे उसकी मंजिल तक पहुचने में उसकी मदद कर सके जिससे उसका सफ़र आसन हो जाये !
किस इन्सान का सफ़र किसे कहाँ तक लेकर जाता है ये कह पाना थोडा मुश्किल ही है क्युकी सबकी तलाश का विषये अलग_अलग है !जिंदगी का सफ़र तब तक चलता रहता है जब तक हमारा जीवन चल रहा है ! हर इन्सान हर दिन एक नई सोच ले कर जगता है जीवन जीने के लिए एसा होना जरुरी भी है अगर एसा नहीं होगा तो जीवन बेजान सी हो जाएगी उसकी जिंदगी में रंगों को होना बहुत जरुरी है वही सब तो हमारे जीवन को रगों से भरती है और हमारा जीवन सरल बना देती है
किसी शायर ने बहुत खूब कहा है :::::: जिंदगी जिन्दा दिली का नाम है , मुर्दा दिल क्या खाक जिया करते हैं !
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nature
bhagwan ne manav ko kitna pyara ye uphar diya!
har taraf apne jalvo se usko sarokar kiya!
har insan uski khubsurti ka gulam ho gaya !
usne har baar humari jindgi ko gulzar kar diya!
ye to such hai teri khubsurti se pyaar to sub karte hain!
par peso ki bhuk use is pyaar se najarandaj karte hain !
tujhe le jakar gldaste me to tujhe sajate hain !
par us jagha par bada ek mahal banate hain!
tera ye dard unse dekha nahi jata shayad!
phir tera ye kahar garibo pe juram dhata hai !
mehlo me betha vo apni kamyabi ka jashan manata hai !
aor tu lachar uska kucch n bigad pata hai !
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