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gandhiji

 बापू जी ओ बापू जी ,  दुनिया के प्यारे बापू जी |
बैर - भाव की भाषा को , न थे अपनाते बापू जी |

सादा जीवन उच्च विचार , हाँ ऐसे थे निराले बापू जी |
प्रेमभाव से मिलकर रहना , ये सिखला गए बापू जी |

चश्मा , लाठी , धोती , कुर्ता , ये परिचय वाले बापू जी |
दुबली - पतली काया पर , द्रीड निश्चय वाले  बापू जी |

बुरा न कहो , बुरा न सुनो  , बुरा न देखो ...
सीधे - सरल अंदाज़ में , सुंदर पाठ पढ़ा गए बापू जी |

देश की आज़ादी में अपना नाम लिखा गए बापू जी |
इन पवित्र चरणों में , हम हरदम शीश नवाए बापूजी |                        


नोजवान



जुडो तो हरदम उससे जो हर बात से अनजान हो !
  उसको गड़ दो येसे जो देश के हित में नाम हो !
    हो सकता है वो इंसा कुच्छ पल को बहक गया हो !
    हमारी छोटी भूल से उसकी सारी  जिंदगी न बर्बाद हो !
    उसकी गलती तो उसको बाद में सबक सिखाएगी !
    हमसे हुई बेरुखी से  तो उनकी जान पे बन जाएगी !
    विनती है इसलिए युवावर्ग को उस हाल में ना जाने दो !
   हर पल इनको प्यार दो , एहसास दो और  समान दो !
   कोई बाहरी शक्ति इनका दुरपयोग न कर पायेगी !
   इनकी तरफ बड़ने से पहले ही थर -थर थराएगी !
    मुझको तो  इस युवावर्ग पर बहुत ज्यादा  विश्वास है !
    लगता है जेसे ये सब ही सुख देव, भगत और सरदार हैं !

१० मिनट १० गोलिया और सारी दिल्ली झावनी मै तब्दील

  '' १० मिनट १० गोलिया और सारी दिल्ली झावनी मै तब्दील  '' कहने और सुनने मै कितना आसन सा लगता है ये सब ,  पर पत्रकारों का ये  काम है रोज़ी रोटी है, लिखना तो पड़ेगा ही नहीं तो देश में हो रहे गति विधियों का पता  केसे चल पायेगा ! ये हमारे देश के वो नोजवान हैं जो जान हथेली मै रख कर ये सब खबर हम तक पहुचाते हैं और हम अपने घर मै बैठ कर सुबह की चाय के साथ इसका आनंद उठाते हैं ! कल जेसे ही हमने भी कुच्छ इसी अंदाज़ मै चाय के कप के साथ ये खबर पड़ी दुख तो हुआ पर उतना नहीं जिनके साथ ये हादसा हुआ होगा जितना वो मिनट मै १० गोलियों ने उनके साथ हकीकत  मै किया होगा ! क्या हो गया है हमारे देश की जनता को की सिर्फ दो लोग थोड़े २ समय मै हमारे देश के अलग २ कोने मै हलचल सी मचा देते हैं और वो कोई और नहीं हमारे ही देश मै रहने वालो मै से होते हैं अगर ये भी कह दिया जाये की हमारे ही देश के नागरिक तो ये भी गलत नहीं हो होगा  और हम इतनी बड़ी तादात मै उन्हें कोई सबक नहीं सिखा पाते और इसी कमजोरी का फायदा वो हर बार उठाते हैं और हम दुसरो की इंतजार मै रह कर उन्हें आगे बढ कर रोक भी नहीं पाते ! ये कोई और नहीं हमारे ही देश का एक एसा युवावर्ग है जो हमारी वजह से समय न दे पाने की वजह से किसी येसे लोगो के  पास पहुँच गई है जिनका मकसद सिर्फ दहशत फेलाना और अराजकता फेलाकर देश को कमजोर बनाना है ! और हमारा एसा युवावर्ग जो अपनी भावनाओ को किसी के सामने रखने मै हिचकिचाता  है अपनी परेशानी को किसी से बाँट नहीं पाता उस  युवावर्ग का इस्तेमाल एसे  लोग बखूबी उनकी भावनाओ से खेल कर करते हैं जिनका अंदाज़ा उन्हें उस वक़्त चलता है जब वे अपना सब कुच्छ गवां बैठते हैं ! क्युकी उस वक़्त का गरम खून और और लालच उनकी आखो मै थोड़ी देर के लिए पर्दा कर देती है और बिना सोचे समझे किसी भी अंजाम तक पहुँचने के लिए तैयार हो जाते हैं क्युकी उनकी नीव इतनी कमज़ोर होती है की वो किसी के सामने आने से घबराते हैं और अपनी कुंठित  भावनाओ का बदला वो जनता से लेने के लिए ये रास्ता चुन लेते हैं और जब होश आती है तो बहुत देर हो गई होती है ! जिसकी नीव ही इतनी कमजोर हो जो खुल कर हमारे सामने आने से पहले अपनी सुरक्षा  के बारे मै सोचता हो वो हमसे ताक़तवर केसे हो सकता है होता तो वो भी हममे  से एक ही  है तो क्यु  न हिम्मत से मिलकर उसका सामना करे और देश के प्रति हम भी अपना फ़र्ज़ अदा करे ! इसी घटना के दोरान एक व्यक्ति ने कहा , की वो २ लोग थे जिन्होंने गोलिया चलाई जब मैने उन्हें देखा तो मै पत्थर ले कर उनकी तरफ भगा और वो भाग खड़े हुए कितना जोश था इन शब्दों मै अगर उस के साथ मिलकर कुच्छ और लोग हिम्मत दीखते तो शायद इस तरह की वारदातों मै कमी आ जाये ! इस बात से ये बात तो साफ़ है की मरने का खोफ तो उनमे भी उतना ही है जितना हम लोगो मै तो हम भी क्यु न उन्ही की तरह हिम्मत से काम ल़े 
                                                                                जब भी एसी घटना होती है हम दुसरे देशो पर उंगली उठाना शुरू कर देते हैं बाहर  झांकने से पहले हमे अपने घर अपने देश के नागरिको पर नज़र डालनी चाहिए !  रामायण मै एक बहुत  ही सुन्दर पंक्ति लिखी गई है  '' घर का भेदी लंका ढाहे '' सुनने मै बहुत बुरा लगता है पर ये शब्द हकीकत बयान भी करता है ! जब तक हम अपने देश की खबर बहार जाने से नहीं रोकेंगे तब तक एसी वारदातों को होने से कोई नहीं रोक सकता !  क्युकी दूसरा देश तो सिर्फ योजना बनाता  हैं और उसी  देश के नागरिको का इस्तेमाल उसी के देश मै करता है और इसका शिकार बनते हैं हमारे   देश के वही भोले भाले युवावर्ग जो अपनी बात किसी से नहीं कह पाते हैं और उन्ही की भावनाए दाव पर लग जाती हैं ! वह युवा कोई और नहीं आपके या हमारे ही घर का सदस्य होता है बस हमे उन्ही का विश्वास जितना है उन्हें प्यार दुलार से बड़ा करना है उनके अन्दर अच्छे २ संस्कारो को जनम देना है जिससे वो गलत राह पकड़ने से पहले अच्छे और बुरे का फर्क कर सके वो हर सदस्य की भावनाओ को समझ सके और एक दुसरे से अपनी बात को कहने की हिम्मत कर सके हमे जरुरत सिर्फ और सिर्फ उन सदस्यों की तरफ ध्यान देना हैं जो आज के युग मै ५ या ६ लोगो से बना है अगर हम इनकी परवरिश अच्छे संस्कारो से करते  हैं तो फिर हम सभी परिवारों  को जोड़  कर एक अच्छे देश , अच्छे राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं और ये २ मिनट मै १० गोली का काम हमेशा के लिए तमाम कर सकते हैं !
                                                                                                                           

हिंदी हमारी मातृभाषा


                                                                                      
                                                                                      आज मैं  बहुत खुश हूँ  की मैं  अपनी प्रिये भाषा का वर्णन उसी की भाषा में करने जा रही हूँ  मै सभी हिंदी भाषी प्रेमियों का  तहे दिल से शुक्रगुजार  हु की आप सब लोगों  की कोशिशो की वजह से हम अपने विचारो को अपनी मात्रभाषा के रूप व्यक्त कर पा रहें  हैं | जिसका हमे गर्व है की वो मूल [ जड़ ] जो कहीं  दब गई थी  आज फिर से उठने की कोशिश करने लगी  है और एक बड़ा वृक्ष बनने की भरपूर कोशिश में हैं   इसको बड़ने में  भले देर हो सकती है पर अगर हम सब  मिलकर इसे सींचते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब ये फल देना शुरू कर देगा और इसके मीठे स्वाद से हर कोई परिचित हो जायेगा |
                  किसी  भी भाषा का ज्ञान  होना अपने आप में बहुत गर्व  की बात  है हम जितनी ज़यादा  भाषा सीखे  उतनी अच्छी तरह से लोगो के विचारों को समझ सकते हैं , भाषा की जानकारी से ही हम एक दुसरे के विचारो को आपस में  बाँट सकते हैं | जहाँ तक हिंदी भाषा का सवाल  है तो एक भारतीय होने के नाते हमें  इस पर गर्व होना चाहिए और हर भारतीय को इसका ज्ञान  होना बहुत जरुरी है | हम हिंदी भाषी होते हुए भी अपने देश में इसका इस्तेमाल न करके दूसरी भाषा को बढावा देते रहे ? ये सब  क्यु हुआ ऐसा सोच कर भी हमे शर्म आती है |सबसे पहले हमें  अपनी भाषा को सम्मान देना चाहिए उसके बाद दूसरी भाषा की जानकारी रखते हुए देश को आगे ले जाना  चाहिए बात तो वही है पर उसके थोड़े से फेर बदल से हम अपने देश और भाषा दोनों का सम्मान कर सकते हैं | हमारे देश में  ज्यादातर  लोग गरीबी रेखा से नीचे के हैं ,जिन्हें दो वक़्त की रोटी न मिल पा रही  हो वो नेताओ दवारा दिए गए किसी ऐसे  भाषण को कैसे  समझ पाएंगे जिस भाषा का उनके जीवन में दूर -२ तक कोई ताल्लुख ही न हो | भाषा संवेदनाओ को व्यक्त  करने का माध्यम  होता है और हमारी भाषा उसे बड़ी आसानी से समझा देती है , जब इतनी प्यारी भाषा हमारे पास है तो हमें  किसी और भाषा को अपनाने की क्या जरुरत है हमें  तो इसका सम्मान करना चाहिए | पहले हमेशा दिल में  ये ख्याल आता था की क्या कभी इसे भी कोई स्थान मिल पायेगा या नहीं पर अब धीरे -२ ये एहसास होने लगा है की हमारी देश की जनता को भी इसकी अहमियत का पता चलने लगा है तभी तो वो अपने घर की चार दीवारों में  मज़े ले -२ कर बोलने के पश्चात् अब सार्वजानिक स्थानों तथा बड़े -२ मंचो में  भी बेहिचक बोलने में  शर्म महसूस नहीं करते  आज हिंदी भाषा की मांग को देख कर लगता है की हमारा देश फिर से अपने संस्कारो की और रुख करने लगा है जिसे वो विदेशियों की भाषा बोलते -२ भूलने लगा था | आजकल  दफ्तर , बैंकिंग , मिडिया , अध्यापन  के क्षेत्र में  इसकी मांग बढती  जा रही है और जो युवावर्ग हिंदी   प्रेमी हैं उनके अन्दर ख़ुशी की लहर दौड़ने  लगी है |
                                                                           आज हिंदी को सिखाने की ललक हमारे देश में   ही जोर नहीं पकड़ रही बल्कि विदेशी लोग भी हमारे देश की बहुरंगी सस्कृति को जानने के लिए हिंदी भाषा सिख रहे हैं | संस्कृति के अलावा जो विदेशी कम्पनियां  भारत में  अपने बाज़ार और कारोबार का विस्तार चाहती हैं वे भी अपने कर्मचारियों  को हिंदी सिखने के लिए प्रेरित कर रही हैं इस तरह कई देश में जैसे  जापान , चीन , रूस , इंग्लैंड , और कोरिया आदि में  हिंदी पढ़ने - पढाने  का काम चल पड़ा है इसकी जानकारी रखने वालों  को इसके जरिये रोज़गार  भी मिल रहा है |
                                                                       जब बात हिंदी की हो ही रही है तो में  भी आपके साथ अपना एक अनुभव बाँटना चाहूंगी , हमारी एक विदेशी दोस्त हैं जिसने अपने देश के संस्कार , भाषा को न छोड़ते हुए हमारी हिंदी भाषा का ज्ञान हमारे साथ रह कर ही सीखा | आज वो अपने देश से दूर रह कर भी हिंदी भाषा के माध्यम से अपने अनुभव  हमसे बाँटती है और अपने परिवार और देशवासिवो के साथ अपनी ही भाषा से सम्पर्क बनाये रखे है वो बड़े गर्व से हमारे देश में  रह कर बिना किसी की मदद से हिंदी भाषा के माध्यम से अपना रोज़गार आसानी से चला रही है | ये सब  देख कर लगता है की जब दुसरे देश के लोग हमारी भाषा के माध्यम से इतनी आसानी से रोज़ी - रोटी कमा  सकते हैं तो हम पीछे  क्यु रहे ? क्यु न हम अपने आप अपने देश में  अपनी भाषा की एहमियत को समझते हुए उसे पूरा सम्मान दे जिससे कोई दूसरा देश हमारी इस कमजोरी का फायदा न उठाते हुए हमसे आगे निकल जाये  और हम अपनी ही भाषा को बोलने मै शरमाते रह जाये |
                                                                                                                                        जय हिंद !
                                                                    

संसार हमारी प्रतिध्वनी

   हम जेसा चाहते हैं वेसे अपना जीवन बना सकते हैं ! जीवन के बन्धनों से अगर हमे आजाद होना है तो हमे अपने आपको बदलना होगा न की संबंधो को तोडना ! जो अपने आपको बदलने को तैयार  हो जाता है वही जीवन की सचाई को जान पता है की जीवन कितना सुन्दर, कितना रसपुरण और कितना अजीब संगीत से भरा हुआ है पर इन सबको देखने के लिए सुन्दर सोच और महसूस करने के लिए प्यारा सा दिल होना जरुरी है आजतक हमने इसे बंधन ही माना है  क्युकी हमने इसे इसके अन्दाज में कभी जिया ही नहीं हम तो   वो सब करते गए जो दुसरो ने हमसे चाहा क्या गलत है और क्या सही इस तक तो हम कभी पहुंचे ही नहीं बस इसे बोझे  की तरह ढोते चले गए और किसी भी पहलु को ठीक  से समझ ही नहीं पाए  हम , इसलिए अगर जीवन के संगीत का अनद लेना है तो हमे उसके हर संगीत को बड़े धयान से सुनना और समझना होगा !
                                   एक बार दुसरे देश के लोग हमारे देश में घुमने के लिए आये घूमते २ जब वो थक गए तो उन्हें भूख लगी ,तो वो  सब  एक फल वाले के पास गए उन्होंने नारियल देखा तो उन्हें वो थोडा अलग सा फल लगा उन्होंने उसके बारे में पुच्छा तो फल वाले ने उस की बहुत तारीफ की इसमें बहोत प्रोटीन होता है और खाने में भी बहुत  सवाद होता है एसा सुन कर उन सबने उसे खरीद लिया पर उससे तो वो बिलकुल अनजान थे की उसे किस तरह से खोल कर खाया जाता है ! आगे चल कर उन्होंने उसे खाना चाहा पर उसके बारे में कोई जानकारी न हो पाने की वजह से वो उसे खोल न सके ओर सवाद का मज़ा भी न ले सके तो उन्होंने उस फल वाले को बहुत भला बुरा कहा और अपने देश में जाकर भी सभी से उसकी खूब बुराई  करी की इतने बेकार फल को वो लोग इतने प्यार से खाते हैं हमे तो उसमे कोई अच्छाई  नजर नहीं आई और उसने हमे उसकी इतनी खुबिया बता दी थी तो डीक  उसी तरह हमारा जीवन भी नारियल की ही तरह है जो इसको जीने का ढंग नहीं जान पाते उनके लिए वो नारियल के बाहरी  भाग जेसा कढोर और बेसवाद ही लगता है और जब हम इसे भोगने की विधि जान जाते हैं तो यही हमे मीठा  सव्दिष्ट और मोक्ष प्राप्त करने जेसा प्रतीत होने लगता है! पर हमारे जीवन की असफलता उस फल को न चख पाने का बंधन बनती जाती है और उसको न चख पाने की देरी हमे जीवन तोड़ देने के लिए बाध्य कर देती है !
                                                            संसार तो हमारे तरीकों से चलता है हम उसे जेसा रूप सरूप देते हैं वो वेसा ही दीखने लग जाता है! तभी हम कहते भी हैं की संसार एक बंधन है , संसार दुख है  इसे तोड़ दो पर इससे भाग कर कहाँ तक जायेंगे इससे बेहतर तो यही होगा की हम अपने आप को ही बदल डाले इससे हमे ये संसार एक सगीत सा नज़र आने लग जाये और इसके सुख दुःख इसके मधुर गीतों जेसे लगने लगे !