नारी परिचय

नारी परिचय
तितली सी गगन में ,
उडती फिर रही है वो |
सारी सृष्टि को बस में ,
 करने चल पड़ी है वो |
साम , दाम , दंड , भेद 
उसने आज अपना लिया |
न आना उसकी राह में ,
उसने तो  बीड़ा आज उठा लिया |
तोड़ सारे बंधन आगे  
आज वो है  बढ चली |
किसकी थी खता , 
जो आज वो एसी बन चली |
इन्सां होके जब ...
इन्सां के दर्द को न जानोगे |
फिर अपनी अस्मिता के खातिर , 
उसको एसा ही पाओगे |
अब क्यु रुके वो , 
जब राह में इतने कांटे हों बिछे |
क्यु दे -  दे अपनी जान , 
जब जान के दुशमन 
सब उसके हो चले |
नारी के क्रंदन को ,
अपना दर्द गर न बनाओगे |
छुट जायेगा सब कुछ अगर ...
आज उसे तुम न अपनाओगे | 
नारी की देह केवल ,
एक खिलौना ही तो नहीं |
जान भी होती है उसमें , 
ये कब तुम समझ पाओगे ?
सारी सृष्टि में उसका भी तो अंश है |
उसके बिना तो हो सकता विध्वंश है |
नर - नारी दोनों का ,
सम्मान ही अपना धर्म है |
न करना विचार की वो नर से ,
कभी हो सकती भिन्न है |
जितनी  हवा दोगे , 
आग उतनी बढती चली जाएगी |
अपनी ही आग में सबको ...
राख़ करती जाएगी |
रोक लो उसको की ...
वो ज्वाला न बन जाये |
शांत करदो एसे की फिर से 
निर्मल धारा सी हो जाये | 

ज़ज्बात


कुछ का कहना है ...
ताक़त की ख्वाइश ,
लुट  का लालच ,
कमजोरों पर जुल्म ,
किसी की आत्मा पर किया गया 
कुठाराघात ,
ये सब सिर्फ  ज़ज्बात हैं |
दर्द देकर मलहम 
लगाने का ढोंग |
किसी की अश्मिता 
से खेलना ,
उसे अपना कहने की 
एक चाल है |
गरीबों की गरीबी
ढकने का छल |
सारे गुनाह करके भी 
बेखोफ होकर जीना |
हर उठती आवाज़ को 
दबाने का हरसंभव प्रयास |
कैसी है ताक़त ?
कैसी है ये  ख्वाइश ?
फिर भी वो कहते हैं ,
यही ज़ज्बात हैं |

बेखबर बचपन

कितना खुबसुरत  है ये बचपन 
खुद से ही बेखबर |
न कोई सोच , न ही विचार |
न कोई शिकवा , 
न ही कोई शिकायत |
अपनी ही दुनिया में मग्न ,
न कोई  चाहत , न ही बगावत |
आज लड़ना , कल वही अपना |
हर किसी से बेखबर , 
सिर्फ अपनी मंजिल का जश्न |
खुद से सवाल , खुद ही जवाब |
सब कुछ पाने की चाह ,
न मिले तो भी न कोई बात |
मस्त गगन में उड़ते पंछी जैसा ,
स्वछंदता से बस उड़ते रहना |
हर सुबह नए सपनों में जागना |
रोज़ उसे हसीं रंगों से रंगना |
हाँ यही तो है वास्तविक जीवन  |
हर हाल में मस्त , हर बात से बेखबर |

परिचय



फूल मुझे पसंद नहीं , 
मै कांटो का दीवाना हूँ  |
मै जलने वाली आग नहीं , 
जल जाने वाला परवाना हूँ  |
ख्वाब मुझे पसंद नहीं,
मै हकीकत का आशियाना हूँ  |
मै मिटने वाली हसरत नहीं, 
जीने वाला अफसाना हूँ  |
मै थमने वाला वक़्त नहीं,

साथ चलने वाला सहारा  हुं |
मैं ठंडी होती आग नहीं ,
न छु पाने वाली ज्वाला हूँ |
मै रूकने वाली सांस नहीं, 

दिल मे धडकने वाला लावा  हूँ |
कहाँ बांध सकेगा मुझको कोई ,
मैं तो बहने वाली दरिया हूँ |
मैं तो साथ लिए बह जाउंगी  |
सागर में ही तो समाना है|