सूरज ने खुद को जो समेटा है |
शाम ने रात की चादर को ओढा है |
आसमान में तारों का अब पहरा है |
चाँद ने भी तो चुपके से डाला अपना डेरा है |
देखो फिर से वो हंसी रात आई है |
कितने रंगीन सपने वो साथ लाई है |
जाके देखना जरुर आज उस चाँद को ,
क्या अपने लिए भी , वो कोई सौगात लाई है |
वो तो रोज़ चांदनी के संग आता है |
हमारे सपनों में आके हमें चिढाता है |
आज हम भी उसकी चांदनी चुरायेंगे |
देखते हैं आज वो कैसे अपनी रात सजाता है |
हमने भी आज कसम ये खाई है |
चाँद को चांदनी की कसम दिलाई है |
हम भी चांदनी को तब तक न छोड़ेंगे |
जब तक चाँद में दाग क्यु है , ये न जानेगें |
लो आज फिर से ये बात अधूरी रह गई |
हमारे दिल की बात दिल में दबके रह गई |
सूरज की किरणों ने भी दस्तक है दे डाली |
आज फिर से चाँद की चांदनी निगल डाली |`
