ख़बरे कहती हैं हमसे की ?
युवावर्ग बिगड़ रहा है |
कितना आसां है ... यह कहना कि
युवापीढ़ी बिगड़ रही है |
हाथ पकड़ कर चलना तो ,
उसने हमसे ही सीखा है |
घर में रह कर कदम बढाना ,
उसने हमसे जाना है |
वो तो सिर्फ हमारे ही ,
नक़्शे कदम पर चलता है |
उसको दोषी कैसे कह दे ,
वो हमारे संस्कार अपनाता है |
हमसे ही तो कुछ सीख कर वो ...
आगे कदम बढ़ाता है |
कुछ भी कर पाने की हिम्मत ...
वो हमसे लेकर जाता है |
फिर जब अच्छी आदतों की ...
बात जुबाँ पे हमारी आती है |
वो सब हमारी विरासत ,
और उनकी गलती हो जाती है |
जब ऊँगली पकड़ कर चलना ,
हमने उन्हें सिखाया है तो ,
हाथ पकड़ कर बढना भी तो ,
हम ही उन्हें सिखायेंगे |
क्युकी ... जिन्दगी तो एक सफ़र है ...
हर उम्र में सहारे खोजती ही रहती है |
फिर युवा वर्ग है दोषी ?
हम कैसे ऐसे कह सकते हैं |
वो तो सिर्फ सही राह की तलाश में
हरपल आगे बढता है |
थामे रहेंगे हाथ अगर तो ...
वो कैसे दोषी हो सकता है |