कमसीन बाला

तुम इंदु हो या हो बाला 
तुम यौवन हो या मधुप्याला 
कुछ तो मुझे बतला  दो ना |
तुम दीपक हो या ज्योति उसकी 
उषा हो या लाली उसकी 
यह निजसार जरा समझा  दो ना |
तुम इंदु हो या ......................

नीरज की मधुर मुस्कान हो तुम  
कोयल की मीठी तान हो तुम 
तुम शुभ पुष्प की प्यारी सी लता 
या नूतन की हो नूतनता 
उलझन ये सब निपटा दो न 
तुम इंदु हो या .......................

तुम हो सावन की मस्त घटा 
बारिश की अनुपम  तुम हो छटा
तुम रूप प्रत्यक्ष दिखा दो ना ...
तुम प्यारी हो , या प्राण पिया की 
जीवन हो या हो त्राण पिया की 
यह विश्वाश दिला दो न 
तुम इंदु हो या ......................

तुम चित हो या चितचोर 
अधर कहूँ या मुरली उसकी |
भेद मुझे समझा दो ना ...
तुम प्रेम भरी एक गाथा हो 
या हृदय की मीठी भाषा हो |
तुम आशा हो या निराशा हो |
यह सब मुझको समझाओ ना |
तुम  इंदु हो या हो .................

अपना - अपना नजरिया

सबकी मंजिल एक ...
नजरिया जुदा - जुदा 
कोई हंस के तो कोई रोके 
जीवन है जीता 
कोई देके तो कोई लेके 
जीवन फिर भी है चलता 
कोई प्यार से ,
कोई मार से अपना 
सिक्का है जमाता 
समय अपने नज़रिए से 
निरंतर है आगे बढती  
न कभी रुकी है न रुकेगी 
जीवन हर मोड़ पर 
एक अनसुलझी पहेली 
जिसे सुलझाते हुए 
आगे बड़ते जाना है |
न ये तेरी , न ही मेरी 
विरासत में कुछ पल के लिए 
हमको - तुमको है  मिली 
आओ कुछ एसा कर दे कि
इसका एहसान उतर जाए
कौन  आएगा पलटकर 
फिर अपने आस्तिव की 
तलाश में ...
आज का गुजरा पल 
कल ... हमको देने वाला नहीं
सोने - चाँदी की ठेरी
हम कब तक साथ 
रखतें हैं ...
आपस के एहसास ही तो 
हमारे  हरपल साथ रहतें  हैं |
फिर निर्णय लेने में 
इतनी देरी क्यु कर हो 
बदल लो आजसे ही जीवन 
की सफल जीवन हमारा हो |


पूरी फिर भी अधूरी


मुद्दते बीत गई 
तुम न आये अब तक 
सुबह की हर किरण मुझसे ...
तेरा पता पूछती हैं |
चांदनी आ - आके 
दीदार को तरसती है |
फूल भी अपनी महक 
हरबार बिखेर जाती  हैं |
हवाएं भी देख तुझे ...
अपना रुख बदलती  हैं |
खुबसूरत रूह में महकती 
सी ग़ज़ल हो तुम |
सूरज से निकली किरण
जैसी  भी हो तुम |
खामोश रात की चमक 
जैसी हो तुम |
कभी खुशबु , कभी आंसूं 
कभी संगीत  जैसी हो तुम |
खुबसूरत चेहरे की 
एक प्यारी सी मुस्कान हो तुम |
किसी का प्यार , कल्पना 
और इन्तजार भी हो तुम |
पर फिर भी हकीक़त की तरह 
आज भी अधूरी हो तुम |

चुप्पी


  
                                     चुप्पी कितनी प्यारी जुबाँ रखती है |
                                                             बिन कहे हर बात बयां करती है |
                                     हर हाल को बदलने की ताक़त  रखती है |
                                                              सारे फैसलें पल भर मै ये हल करती है |
                                     किसी से कोई शिकवा न कोई शिकायत करती है |
                                                             मेरे तो दिन - रात  ये साथ रहती है |
                                     दुसरे की भावनाओं  का सम्मान करती है |
                                                             मुझे तो ये प्यार का सागर लगती है |
                                     बिन  कहे सारे जवाब हल करती  है |
                                                             सारे मुद्दे बिना कानून के संभाल  लेती है |
                                     रिश्तों  को एक लम्बा सफ़र देती है |