न कहो कोई ख्वाब हमें जो आँख खुलते ही बिखर जाऊ मैं |
न कहना मुझे किसी का दिल जो चोट लगते ही टूट जाऊ मैं |
सावन जो कहोगे मुझे बारिश की तरह फिर मैं बरस जाउंगी |
दरिया न कहो मुझे कही तुम्हे भी साथ लेके न बह जाऊं मैं |
आंसूं जो कहोगे मुझे तो दर्द बनकर आँखों से निकल जाउंगी |
चाँद भी न कहना मुझे सूरज की रोशनी में मद्धम मैं पड़ जाउंगी |
बहती नदिया कहोगे तो भी तो सागर में ही तो समा जाउंगी |
फूल जो कहोगे तो भंवरों की प्यास मैं ही तो हरदम बुझाउंगी |
जिंदगी से तो मैं बावस्ता हूँ उसकी तो हर बात में एक नशा है |
अब जब साथ इतना जरूरी है तो हाथ थाम के दूर निकल जाऊगी |