जिंदगी क्या है जरा बाहर तो आकर देखो |
बंद किताबों के पन्नों को पलटकर क्या होगा |
हकीकत जिंदगी की , शब्दों में उतरकर देखो |
देखकर के चमन को दूर ही से परखना कैसा |
खुशबुएं हसीन नजाकत को छू - छूकर देखो |
महफ़िलों में क्यु छलक जाते है गम के आंसूं |
इसका सबब तो दीवानों की दीवानगी से पूछो |
रात भर जली शमां सुबह क्यु दम तोड़ दिया |
ये अंजामें सफर रात भर जलते परवानो से पूछो |
कीचड़ में रहकर खुदको महफूज रखना हो कैसे |
ये राजे हकीकत कीचड़ में खिले कमल से पूछो |
गम तो है जिंदगी में फिर भी ये इतनी हसीं क्यु है |
अंदाजे जिंदगी से ही इस बात का तुम पता पूछो |
गम तो है जिंदगी में फिर भी ये इतनी हसीं क्यु है |
अंदाजे जिंदगी से ही इस बात का तुम पता पूछो |