बहती नदिया


कब हुई विमुख मैं 
अपने किसी कर्तव्य से |
बह रही हूँ आज भी 
कल - कल के उसी वेग से |
बच - बच के आज भी चलती 
पत्थरों के प्रहार से ... |
कर रही हूँ सबका पोषण 
आज भी उसी सम्मान से |
ऊँचे - ऊँचे पर्वतों को
भेंद्ती में चल रही |
कठिन रास्तो को पार कर 
आगे ही आगे बढ़ रही |
कभी चंचल , कभी कलकल 
कभी भयावह रूप धर - धर के ,
चलती हूँ धरा की गोदी में 
जन - जन की प्यास बुझाने तक |
मिलकर आज जो सागर में 
अपना मैं आस्तिव गंवाती हूँ |
उठकर उसी की गोदी से 
अपना आस्तिव फिर में पाती हूँ |

बीते लम्हों से सजा नया साल




जानते थे वो न रहेगा साथ
मेरे इस छोटे से  घरोंदे में
फिर भी उसकी खातिर
दरवाजे थे खोल दिए मैंने |

वो चलता रहा दूर तक
अपनी ही खुमारी में
लुटाता रहा खुद को
वक्त का रूप धर - धरकर |

कर चूका था वादा
सफर में साथ चलने का
बहुत रोया अहसासे जुदाई को
याद करकर के  |

हाँ था दिल में  प्यार
इसलिए कुछ कह नहीं पाया
अब कहता भी क्या वो तो था
अब बीते वक्त का एक साया |

थमा गया मेरे  हाथ में
अब अपने ही नए एक रूप को
चला खुद को बीता कल कह
आया चुपके से फिर
नए साल का रूप धरकर |

मेरे सभी सम्मानित मित्रों को नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें |

मौसम का सुहाना साथ




मौसम न जाने क्या , साजिश है कर रहा  |
हर तरफ घनी रात का , दामन पसर रहा |

चाँद की चांदनी भी ,  मध्यम है पड़ रही  |
मानो कोहरे की , अब बारात निकल रही |

आसमान में बादल ऐसे , बन - बिगड रहें |
हमसे कोई बात कहने को हों वो तरस रहे |

महसूस होने लगी वही , सिरहन की रात है |
बारिशों के पाँव बंधी घुंघरुओं की आवाज है |

पेड - पौधे बदलने लगे अब  नई पोशाक है |
पहाड़ों को मिली श्वेत चादर की सौगात है |

अजब  मौसम अब मेरे देश का है हो रहा |
मैं कर रही हूँ सफर वो मेरे साथ चल रहा |

बदला - बदला सा इंसान



आँगन की खोज थी मकान मिल गया |
नया शहर तो बिन आँगन के बन गया |

देखो घर कितनी जल्दी है सिमट गया |
रिश्तों की गर्माहट को भी न सह सका |

झरोखों से अब कोई यहाँ झांकता  नहीं |
झत जैसी चीज़ का तो नामोनिशां नहीं |

अपने - अपने जेल में सब कैद हुए है ऐसे |
अपने गुनाह की सजा सब मंजूर हो जैसे |

बाहर की दुनिया से कोई सरोकार ही नहीं |
घर में रहता है कौन इसकी भी खबर नहीं |

तमाशाइयों सी जिंदगी है बनके रह गई |
सबकी आपस में ही है जोरदार ठन गई |

अब किसीसे किसीको न कोई गिला रहा |
जीने का नया सिलसिला जो है चल पडा |

अब इंतहा भी एक हद से है गुजरने लगी |
लो तारीखे अंत अब करीब  है आने लगी |