प्यारी सी कली जब फूल बन खिली


एक प्यारा सा सन्देश बेटियों के नाम .............

तुम तो इस बगिया की प्यारी सी वो कली  हो |
माँ - बाबा के प्यार से अब फूल  बन खिली हो |

जिन्दगी की दौड़ मैं खुद को तुम कम न समझना |
तुमपर टिकी है नींव पर इसे  विरासत न समझना |

किसी के अत्याचार को तुम भूलकर न सहना |
पर किसी को प्यार देने से पीछे  तुम ना हटना |

बच्चों  को प्यार देना और अच्छे संस्कार देना |
कोई तुम्हें दुत्कारे तो उसका भी जवाब देना |

सबका ख्याल रखना बेचारगी में  न जीना |
स्त्री की हिम्मत समझ उसको बनाये रखना |

जिंदगी  रोज़ एक सवाल है  जवाब देते रहना |
अपने  संसार को  बस ऐसे  खुशहाल रखना | 

दोनों घरों की इज्ज़त तुम..बरकरार रखकर ,
प्यारी बगिया को हर दम खुशहाल  रखना |  

सबकी दुआएं  तुम लेना सबको दुआएं  देना |
दोनों से  ही है ये दुनिया बस ये ख्याल रखना |

यु न कहो पत्थर दिल

क्यु इतना प्यार दिखाती हो 
उस पर लुट जाना चाहती हो 
फिर हर बार क्या सोच कर तुम 
उससे खुद को यु बचाती हो 
क्या तेरे दिल मै प्यार नहीं ?
क्या उसके जेसा एहसास नहीं 
फिर बार बार उस तक जाके 
क्यु लोट जाना चाहती हो 
उसके एहसास जगाती हो 
उसके अरमान सजाती हो 
जब वो सपनो मै रंग भरता है 
तो क्यु........  बेरंग उसे कर आती हो 
फिर क्यु उसका अच्छा तुम चाहती हो
 उसके अरमान जगाती हो 
अपने को यु पत्थर  दिल कह फिर 
क्यु  उसका दिल  यु दुखाती हो ? 

आह

बहुत समय से युवती की व्यथा लिख रही थी !
आज दिल ने कहा क्यु  न मर्द की आह भी लिख डालू !
 हम कहते हैं की मर्द बेवफा होता है !
तो क्या उनके  सीने  मै दर्द नहीं होता है ?
ओरत तो अपने दर्द को आंसुओ से बयाँ कर देती है !
मर्द का व्यक्तितव तो उसे इसकी भी इज्ज़ाज़त नहीं देता !
 कहाँ समेटता होगा वो इस दर्द को ?
वकत के साथ साथ सबका  छुटता हुआ साथ !
किसी से कुछ भी तो नहीं कह पाता है वो ,
बस अपने आपको अपने मै समेटता चला जाता है !
अपनी भावनाओ को किसी से कह भी नहीं पाता
उसे भी तो सहानुभूति , प्यार की जरुरत होती होगी न
फिर वो बेवफा केसे हो सकता है ?
हमारा प्यार जब उसे हिम्मत दे सकता है
तो वही प्यार उसे मरहम क्यु  नहीं ?

पुरस्कार


कोई पुरस्कृत क्यु होता है ?
कोई जिंदगी भर बिना इनाम के ही ....
इनाम वाला भी  हो जाता है
और कुच्छ लोग लगातार .........
नाम - इनाम बटोरते ही रहते हैं
तो कुच्छ नाम येसे  भी हैं ,
जो इनाम की शक्ल  ही बदल देते हैं
वे लेते हैं......... तो खबर बनती है
ठुकराते हैं...... तो भी खबर बनती है
क्युकी जो धूर्त होते हैं ...
वो ........बहुत मीठे होते हैं
और मीठे फलो मै कीड़े भी
जल्दी होते हैं ...............
तो बस उनकी मुस्कराहट को
तय करने दो .......?.
की उनकी मुस्कान कितनी निर्दोष है
और फिर वो  मिले तो जानो .....
 की उनकी आँखों मै कितनी चमक है ?
आखिर मै बस..... मिट्ठा न मिले तो..........
नमकीन से काम चलेगा क्या ?
आजकल तो जेबकतरों और
उठाई -गीरों को भी इनाम
दे दिए जाते हैं ...............
तो अब हम केसे तय करे की ...........
पुरस्कार केसे दिए जाते हैं ?