माँ की कोख , लुट गई ,इंसानियत घुट के , रह गई |कुछ कमजर्फ लोगो ने ,ये घिनौना , कृत्य कर डाला |
बच - बच के थी , चल रही ,
खुद को , साबित भी कर रही |
फिर भी न जाने , दरिंदगी ने ,
बे - वजह , क्यों जुर्म ढा डाला |
उठा अब हाथ में भाला ,
लगा अब नार तू नारा |
उठाये उंगली जो आन पर ,
तो लगा उसको किनारा |
बहुत हो गया अब सम्मान ,
इंसा बन गया हैवान |
अब जमीं में फिर से
दुर्गा का अवतार चाहिए |
उतार , सीने में खंजर ,
तौबा करने लगे , जन - जन |
तू इस अंदाज़ से ,
आँखों में सबके फिर , खौफ उतार दे |
त्राहि - त्राहि का होने लगे गूंजन
सहम जाये फिर हर एक मन ,
दिखा कुछ ऐसा जलवा की ,
हर दिशा में जय जयकार हो जाये |
वो दिन - भर बातें करती थी ...
कुछ चुपके - चुपके कहती थी |
मेरी सांसों में हरपल उसकी
भीनी सी खुशबु रहती थी |
आने वाली ... हर आहट ...
उसकी याद दिलाती थी |
वो दुरी हमसे रखकर भी
अहसास जगाकर जाती थी |
दिन - रात वो ख्वाब सजाती थी ...
बस कहने से घबराती थी |
वो जान से मुझको प्यारी थी ...
पर मुझसे वो कतराती थी |
न वक़्त कभी ऐसा आया ...
मैं उससे न था मिल पाया |
वो साया बनकर , साथ मेरे ...
दिन - रात सफर में रहती थी |
आँखे जब भी नम होती थी ...
उसकी यादें संग होती थी |
वो पगली मेरे ख्वाबों की ...
अक्सर शहजादी होती थी |
आओ सैयां खेले होरी
तुझ संग बंधी है प्रीत की डोरी
लाल - पीला और नीला - पीला
तुझ जैसा है ये रंग सजीला
तेरे बिन फीकी ये होली
चल मिलके हम खेले होली
हर तरफ रंगों की बोली
सजी हुई हर तरफ है टोली
पानी भर - भर के पिचकारी
भीगा रहें सबकी है चोली
दिल में रहें न गिला अब कोई
बोल दे सबसे मीठी बोली
चल मिलकर खाएं भंग की गोली
बोले सब बम - बम की बोली
चल सैयां मिलकर खेलें होली
हर दिशा खिल उठे सजीली |
सभी दोस्तों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं :) ♥