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दिल


छोटा सा दिल ये मेरा ,
                     हर दम धड़कता है !
इसको हम केसे रोके ,
                    हमसे ये कुच्छ कहता है !
जाने अनजानी राहों से ,
                    हरदम ये गुज़रता है !
पागल ,आवारा ,दीवाना ,
                   हर कोई इसको कहता है !
मैने भी इक दिन पूछा उससे,
                   कहाँ तेरा ठिकाना है !
हंस कर वो बोला मुझसे ,
                चल तुझे कहाँ जाना है !
मैने भी थामी ऊँगली,
                चल दी उसके साथ मै !
 रास्ता तो बड़ा कठिन था ,
                  जाना दिल का हाल रे !
छोटे से दिल का ये सफ़र ,
                  होता है कमाल रे !

बच्चो को दे प्यार और विश्वास

               महिला एवं शिशु विकास मंत्रालय ने युनिसफ़ और कुच्छ एनजीओ के साथ मिलकर हाल ही मै चाइल्ड येब्युस के मामले मै भारत के १६ राज्यों का सर्वे किया है ! इस सर्वे मै शामिल ५३% बच्चो ने माना की वे कभी ना कभी शारीरिक शोषण करने वालो में से ५०% जान पहचान वाले लोग ही थे ! बचियों  की तुलना में बच्चे शारीरिक शोषण का ज्यादा शिकार हो रहे हैं !
                                         ये हमारे देश मै नहीं दुनिया भर मै घटने वाली जटिल समस्या है जिसको हम किसी भी तरह नज़र अंदाज़ नहीं कर सकते जिसकी खबर हम हर रोज़ अख़बार , टेलीविज़न के माध्यम से देखते और सुनते हैं ! कितना प्यार करते हैं हम अपने बच्चो से ? हमारा जवाब होता है ''''''''बहुत ज्यादा ;;;;; कितना ख्याल रखते हैं हम अपने बच्चो का ? हमारा फिर वही जवाब '''''बहुत ज्यादा ! फिर ये सब  केसे हो जाता है ? कही न कही तो हम उनकी देख रेख मै चुक कर ही रहे हैं जिसका भुगतान हमारे मासूम बच्चो को उठाना पड़ता है ! कोन सी है हमारी वो भूल ? हमे अपने बच्चो के साथ एक दोस्त की तरह रहना चाहिए अपने रोज़ -मर्रा की जिंदगी मै से कुच्छ पल उनके साथ व्यतीत करना चाहिए उनके खट्टे - मीठे पालो को उनके साथ बाँटना चाहिए ! उनका विश्वास जीतना चाहिए क्युकी हर इन्सान अपने साथ घटित घटना को किसी न किसी के साथ बंटाना चाहता है और उसकी प्रतिक्रिया जानना चाहता है ! जब हम अपने बच्चो के करीब जायेंगे उनके एहसासों को बाँटेंगे तभी हम उनके जीवन की गतिविधियों से अवगत रह पाएंगे और वो हमसे खुल कर अपने दिल की बात कह पाएंगे ! हमे एसा करके उन्हें अच्छे बुरे का ज्ञान देकर उनकी हिम्मत को बढाना है जिससे वो अपने खिलाफ होने वाले शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठा सके और दोषी को अपनी हिम्मत से पस्त कर सके ! हमे  अपने बच्चो की नीव इतनी मजबूत करनी होगी की वो थोड़े से ही हिलाने से गिरे नहीं बल्कि उसे ही गिरा दे जो उनकी नीव को हिलाना चाहता है और ये काम कोई और नहीं हम माँ-बाप ही अच्छी तरह कर सकते हैं क्युकी वो किसी ओर की नहीं हमारी और आपकी जिमेदारी है जब हम ही उन्हें संरक्षण नहीं दे पाएंगे तो हम दोषी को सजा केसे दिला पाएंगे !
  बच्चो मै शोषण के मामले अधिकांशतः घर की चार दिवारी से कभी बाहर निकल ही नहीं पाते दोषियों के खिलाफ केस दर्ज करवाने की बात तो बहुत दूर की है ,पर जब तक हम उनके खिलाफ आवाज़ नहीं उठाएंगे येसे मामले खत्म होने का नाम ही नहीं ले सकते और येसे लोगो की हिम्मत बढती चली जाएगी !ये बात १००% सच है की जितने भी इस तरह के शोषण होते हैं वो हमारे करीब के लोग ही होते हैं ! और इस मै हर वर्ग के लोग आते हैं !कुच्छ लोगो का कहना है की येसे लोग मानसिक रूप से बीमार होते हैं पर मेरा ये सोचना है की अगर वो मानसिक रूप से बीमार होते हैं तो अपने और दुसरे के बचो मै फर्क केसे कर लेते हैं उस वक़्त उनकी बीमारी ठीक  केसे रहती है ये सिर्फ एक क्षण की भूख भर है जो आदमी को अँधा बना देती है और मासूम का जीवन तबहा  कर देती है ! येसे व्यक्ति को बिलकुल माफ़ नहीं करना चाहिए ! हमे अपने बच्चो को अपने करीबी लोगो से हमेशा सतर्क रहना सीखना चाहिए ! जिससे वो उनकी मसुमियता का फायदा कभी अंकल ,चाचा या भाई बन कर न उठा सके ! हमे इन लोगो से ज्यादा विश्वास अपने बच्चो की बातो पर करना होगा जिससे कोई बाहर का आदमी हमसे मीठी -२ बाते करके हमारे बच्चो के साथ दुराचार न कर सके ! उन्हें इज़त करना सिखाना है पर अगर उस की आड़ मै उनसे कोई गलत व्यव्हार करे तो उसका जवाब देना भी सीखना होगा !ये सब  हमारे और आपके प्रयत्न से ही पूरा हो सकता है ! बस हमारा काम है बच्चो के अन्दर विश्वास और हिम्मत जगाने की जिससे उन्हें हमारी मदद  की जरुरत होने पर अपना मुह बंद न रखना पड़े उनका हम पर  विश्वास ही उन्हें हमसे संपर्क बनाने मै मदद करेगा !
                                               बच्चो को प्यार देने का अर्थ ये नहीं की हम उन्हें समय से खाना दे देना या उनके नम्बरों का लेखा जोखा देख लिया इन सब के साथ -२ हमे उनमे आने वाले बदलाव पर भी नज़र रखनी चाहिए की कही हमारा बच्चा किसी तरह की परेशानी से तो नहीं जूझ रहा या चुप -चाप क्यु रहने लगा है आदि हम ये सब काम उन्हें अपना थोडा सा समय दे  कर आसानी से कर सकते हैं और अपने बच्चो को एक सुरक्षित जीवन प्रदान कर सकते हैं !


नोजवान



जुडो तो हरदम उससे जो हर बात से अनजान हो !
  उसको गड़ दो येसे जो देश के हित में नाम हो !
    हो सकता है वो इंसा कुच्छ पल को बहक गया हो !
    हमारी छोटी भूल से उसकी सारी  जिंदगी न बर्बाद हो !
    उसकी गलती तो उसको बाद में सबक सिखाएगी !
    हमसे हुई बेरुखी से  तो उनकी जान पे बन जाएगी !
    विनती है इसलिए युवावर्ग को उस हाल में ना जाने दो !
   हर पल इनको प्यार दो , एहसास दो और  समान दो !
   कोई बाहरी शक्ति इनका दुरपयोग न कर पायेगी !
   इनकी तरफ बड़ने से पहले ही थर -थर थराएगी !
    मुझको तो  इस युवावर्ग पर बहुत ज्यादा  विश्वास है !
    लगता है जेसे ये सब ही सुख देव, भगत और सरदार हैं !

१० मिनट १० गोलिया और सारी दिल्ली झावनी मै तब्दील

  '' १० मिनट १० गोलिया और सारी दिल्ली झावनी मै तब्दील  '' कहने और सुनने मै कितना आसन सा लगता है ये सब ,  पर पत्रकारों का ये  काम है रोज़ी रोटी है, लिखना तो पड़ेगा ही नहीं तो देश में हो रहे गति विधियों का पता  केसे चल पायेगा ! ये हमारे देश के वो नोजवान हैं जो जान हथेली मै रख कर ये सब खबर हम तक पहुचाते हैं और हम अपने घर मै बैठ कर सुबह की चाय के साथ इसका आनंद उठाते हैं ! कल जेसे ही हमने भी कुच्छ इसी अंदाज़ मै चाय के कप के साथ ये खबर पड़ी दुख तो हुआ पर उतना नहीं जिनके साथ ये हादसा हुआ होगा जितना वो मिनट मै १० गोलियों ने उनके साथ हकीकत  मै किया होगा ! क्या हो गया है हमारे देश की जनता को की सिर्फ दो लोग थोड़े २ समय मै हमारे देश के अलग २ कोने मै हलचल सी मचा देते हैं और वो कोई और नहीं हमारे ही देश मै रहने वालो मै से होते हैं अगर ये भी कह दिया जाये की हमारे ही देश के नागरिक तो ये भी गलत नहीं हो होगा  और हम इतनी बड़ी तादात मै उन्हें कोई सबक नहीं सिखा पाते और इसी कमजोरी का फायदा वो हर बार उठाते हैं और हम दुसरो की इंतजार मै रह कर उन्हें आगे बढ कर रोक भी नहीं पाते ! ये कोई और नहीं हमारे ही देश का एक एसा युवावर्ग है जो हमारी वजह से समय न दे पाने की वजह से किसी येसे लोगो के  पास पहुँच गई है जिनका मकसद सिर्फ दहशत फेलाना और अराजकता फेलाकर देश को कमजोर बनाना है ! और हमारा एसा युवावर्ग जो अपनी भावनाओ को किसी के सामने रखने मै हिचकिचाता  है अपनी परेशानी को किसी से बाँट नहीं पाता उस  युवावर्ग का इस्तेमाल एसे  लोग बखूबी उनकी भावनाओ से खेल कर करते हैं जिनका अंदाज़ा उन्हें उस वक़्त चलता है जब वे अपना सब कुच्छ गवां बैठते हैं ! क्युकी उस वक़्त का गरम खून और और लालच उनकी आखो मै थोड़ी देर के लिए पर्दा कर देती है और बिना सोचे समझे किसी भी अंजाम तक पहुँचने के लिए तैयार हो जाते हैं क्युकी उनकी नीव इतनी कमज़ोर होती है की वो किसी के सामने आने से घबराते हैं और अपनी कुंठित  भावनाओ का बदला वो जनता से लेने के लिए ये रास्ता चुन लेते हैं और जब होश आती है तो बहुत देर हो गई होती है ! जिसकी नीव ही इतनी कमजोर हो जो खुल कर हमारे सामने आने से पहले अपनी सुरक्षा  के बारे मै सोचता हो वो हमसे ताक़तवर केसे हो सकता है होता तो वो भी हममे  से एक ही  है तो क्यु  न हिम्मत से मिलकर उसका सामना करे और देश के प्रति हम भी अपना फ़र्ज़ अदा करे ! इसी घटना के दोरान एक व्यक्ति ने कहा , की वो २ लोग थे जिन्होंने गोलिया चलाई जब मैने उन्हें देखा तो मै पत्थर ले कर उनकी तरफ भगा और वो भाग खड़े हुए कितना जोश था इन शब्दों मै अगर उस के साथ मिलकर कुच्छ और लोग हिम्मत दीखते तो शायद इस तरह की वारदातों मै कमी आ जाये ! इस बात से ये बात तो साफ़ है की मरने का खोफ तो उनमे भी उतना ही है जितना हम लोगो मै तो हम भी क्यु न उन्ही की तरह हिम्मत से काम ल़े ! 
                                                                                जब भी एसी घटना होती है हम दुसरे देशो पर उंगली उठाना शुरू कर देते हैं बाहर  झांकने से पहले हमे अपने घर अपने देश के नागरिको पर नज़र डालनी चाहिए !  रामायण मै एक बहुत  ही सुन्दर पंक्ति लिखी गई है  '' घर का भेदी लंका ढाहे '' सुनने मै बहुत बुरा लगता है पर ये शब्द हकीकत बयान भी करता है ! जब तक हम अपने देश की खबर बहार जाने से नहीं रोकेंगे तब तक एसी वारदातों को होने से कोई नहीं रोक सकता !  क्युकी दूसरा देश तो सिर्फ योजना बनाता  हैं और उसी  देश के नागरिको का इस्तेमाल उसी के देश मै करता है और इसका शिकार बनते हैं हमारे   देश के वही भोले भाले युवावर्ग जो अपनी बात किसी से नहीं कह पाते हैं और उन्ही की भावनाए दाव पर लग जाती हैं ! वह युवा कोई और नहीं आपके या हमारे ही घर का सदस्य होता है बस हमे उन्ही का विश्वास जितना है उन्हें प्यार दुलार से बड़ा करना है उनके अन्दर अच्छे २ संस्कारो को जनम देना है जिससे वो गलत राह पकड़ने से पहले अच्छे और बुरे का फर्क कर सके वो हर सदस्य की भावनाओ को समझ सके और एक दुसरे से अपनी बात को कहने की हिम्मत कर सके हमे जरुरत सिर्फ और सिर्फ उन सदस्यों की तरफ ध्यान देना हैं जो आज के युग मै ५ या ६ लोगो से बना है अगर हम इनकी परवरिश अच्छे संस्कारो से करते  हैं तो फिर हम सभी परिवारों  को जोड़  कर एक अच्छे देश , अच्छे राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं और ये २ मिनट मै १० गोली का काम हमेशा के लिए तमाम कर सकते हैं !