तकरारे वफा

Photo: तकरारे वफा 

वो कहता है  , " मुझमे अब वो पहले जैसी कोई बात ही नहीं |
मैंने कहा , " तेरे दिल में मेरे लिए अब वो , ज़ज्बात ही नहीं |

वो कहता है  , " मेरी कशिश में पहले जैसी खलिश ही नहीं |
मैंने कहा , " तेरी चाहत में अब वो बेइंतहा  तड़प ही नहीं  |

उसने कहा , " तुम अब भी नहीं बदली , वही अंदाज़ रखती हो |
मैंने कहा , " मोहोब्बत हूँ पर बिखरकर संभलने का हुनर रखती हूँ |

उसने कहा , " बार - बार बदलना ये फितरत में नहीं मेरे |
मैंने कहा , " बेवफा ही सही फिर भी वफा की चाह रखती हूँ |

मायूस होकर  , " भूल जाना हमें अब और दर्द न सह पायेंगें |
मैंने कहा , कैसे भूलें ?
तेरे सिवा दिल में किसी और को रख भी तो न पाएंगे |

वो कहता है , " मुझमे अब वो पहले जैसी कोई बात ही नहीं |
मैंने कहा , " तेरे दिल में मेरे लिए अब वो , ज़ज्बात ही नहीं |

वो कहता है , " मेरी कशिश में पहले जैसी खलिश ही नहीं |
मैंने कहा , " तेरी चाहत में अब वो बेइंतहा तड़प ही नहीं |

उसने कहा , " तुम अब भी नहीं बदली , वही अंदाज़ रखती हो |
मैंने कहा , " मोहोब्बत हूँ पर बिखरकर संभलने का हुनर रखती हूँ |

उसने कहा , " बार - बार बदलना ये फितरत में नहीं मेरे |
मैंने कहा , " बेवफा ही सही फिर भी वफा की चाह रखती हूँ |

मायूस होकर , " भूल जाना हमें अब और दर्द न सह पायेंगें |
मैंने कहा , कैसे भूलें ?
तेरे सिवा किसी और को दिल में रख ही  न पाएंगे |

एक दस्तक जरुरी



गंगा का किनारा
दूर क्षितिज में छुपता सूरज
शंख - घंटियों की ध्वनि
हाँ यही तो है हमारा हिन्दोस्तान
और वही दूसरी तरफ ...
कुछ घरों में फांकों की नौबत
घर से बहार जान की कीमत
हर निगाह निगलने को बैचेन
हर कदम पर भाप बनकर उड़ते होंसले
कहीं शिकस्त इरादों से सुलगती जिन्दगी
बड़े - बड़े निर्माण में योगदान बांटता
सफलता की सिडीयों में आगे - आगे दौड़ता
एक तरफ ऊँचाइयों को छु रहा भारत
और दूसरी तरफ ...
अपनी जड़ों को कमजोर कर रहा भारत |

अपनी - अपनी सोच

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राह में सफर तो सब , करते हैं साथ - साथ 
धर्म के नाम पर , जाने फिर क्यु बबाल है |

धीरे - 2 बना रहे हैं लोग , मुझसे दूरियां 
मेरी ऊँचाइयों का , क्या ये पहला पड़ाव है |

मंजिल की और बड़े जब , तो सब हम ख्याल थे 
अब न जाने क्यु , और किस बात पर तनाव है |

मुश्किल से डगर में , मिलते हैं कभी - कभी 
पर हमने सुना है , कि दोनों में मनमुटाव है |

कुछ लोग थे ऐसे , जिन पर हमें एतबार था 
लगता है उन लोगों का भी अब , खाना खराब है |

कुछ का कहना है , कि गरीबी कुछ और साल है 
हमें तो है लगता ये उन सबका , ख्याली पुलाव है |

सिर्फ एक आह


वो भाग गई , वो भाग गई 
हम न कहते थे वो भाग जायेगी |
इस शोकाकुल शब्द ने जगा दिया हमें 
कितने दुःख कि बात थी 
पर उस शोर में दर्द नहीं .....
एक खुशी थी , एक मज़ा था 
किसी के दर्द में खुश होने की खुशी 
पता चला बस्ती से एक लड़की लापता है 
पर कोई नहीं जानता कि वो कहाँ है ?
हर निगाह उसे खोज रही है
उसके घर कि ख़ामोशी ...
उसके खो जाने का बहुत बड़ा सबूत है |
हाँ रपट लिखवाई गई है |
कार्यवाही भी चल रही है ,
पर मुन्नी का कोई पता नहीं |
घर वाले इस बात से बेखबर नहीं हैं  |
मुन्नी के दर्द को उन्होंने करीब से महसूस किया है |
उसके आगे घर के हालात कभी छुपे कहाँ थे ?
एक - एक निवाले के लिए इंतज़ार करना
कभी खाना , कभी भूखे सो जाना
हर सुबह जीना और हर रात मर जाना
पिता को अपने ब्याह कि फ़िक्र में ...
पल- पल मरते देखा था उसने
हाँ सच कहते थे लोग कि वो गाँव से भाग गई
पर सच इतना नहीं है ...
सच तो ये है कि वो सिर्फ गांव से ही नहीं
बल्कि इस जहान से भाग गई थी ...
अपने नाम का निवाला कम कर ...
पिता की चिंता को कम करने के लिए |