बस कुछ पल

Nature Love Photo Frame

चेहरे से जरा दर्द को , हटा कर तो देख  |
मेरे कहने से जरा , मुस्कुरा के तो देख |

महफूज़ नहीं है यहाँ , कोई भी काफिला  |
तू बदले तेवर , इन हवाओं के तो देख  |

मैं कब से आस की जोत , जला कर हूँ बैठी | 
तू मेरी वफ़ाओं को दिल में , बसाके तो देख |

छोडो उन्हें जो बस्तियों में , बैठे हैं शौक से |
तू खुद के लिए ,एक घर बनाके तो जरा देख  |

क्यु रोता है शहर में होते , सितम को देखकर |
जो हो रहा है खुदके जहन में लाके तो जरा देख  |

पल - पल तेरी याद में ही , बीतता है हर पल |
तू कुछ पल को मेरे दिल में भी , झाँक के तो देख |

तुझे कसम है इस मासूम से , दिलो - जान की |
मेरे साथ भी  एक बार , वफा निभा के तो देख |

नई सुबह

 
घर के आँगन में ठहरती
वो धूप की लालिमा
दूर क्षितिज के पार ...
रात की चादर मुझपर ड़ाल
दूर जाती हुई |
चाँद मुस्कुराता हुआ
तारों की बारात संग खुद को
संवारता  हुआ ...
अपनी डोली में बैठकर
अँधेरी रात सजाने निकल पड़ा |
रात दुल्हन की तरह सजी
लाज  से खुद को समेटे
चाँद के इंतज़ार में बैठी  |
बिस्तर की खुशबु खूबसूरत
मदहोश महकती रात का
अहसास दिलाती हुई  |
सारी कायनात थम सी गई |
सबकी  बेकरारी बढने लगी |
चांदनी का पहरा लगने लगा |
रात की स्याही ने चादर पर
अपना पैगाम लिख डाला |
फूल की खुशबु ने सारे
आलम को महका दिया |
सनम ने चुपके से ...
कानों में क्या कहा |
हर तरफ सन्नाटे की चादर
पसर गई |
बिस्तर की  सलवटों ने
चांद के आने का सबूत दे डाला |
हवा के मंद झोकें बदन को
छुकरके जब गुजरे |
सुबह की किरणों ने फिर से
दस्तक दे फिर  नई सुबह का
सुन्दर  पैगाम दे डाला |

मौन निमंत्रण

मौन देता हमको निमंत्रण ,
मौन ही तो  फरियाद करता |
मौन की शक्ति निराली ,
मौन की भक्ति है प्यारी |
मौन अपनाकर के पीड़ा ,
मुख में है  मुस्कान भरता |
मौन की भाषा मधुर है ,
मौन  की मस्ती है  न्यारी |
मौन में अहसास पलता ,
भावना की कद्र करता |
मौन जब मुखर है होता ,
अनसुना संगीत  बजता |
गहन अवसादों  के क्षणों में 
मौन ही होता है संबल |
दर्द जब हद से गुजरता ,
मौन में ही कल - कल है बहता |
मौन में है  संगीत सजता ,
मौन मैं ही है गीत बजता |
मौन का तो सफर अनोखा 
मौन की भाषा , न कोई जाना |
वाणी का न साथ लेकर 
ये नया इतिहास रचता |
कोई न इसको है जाना ,
इससे न कोई जीत सकता |
निशब्द , निर्विकार , निष्काम ,
न जाने किस वाणी से है ये बंधता ?
आह की अनभिज्ञ घड़ी में 
साथ - साथ मौन ही है रिसता |
वेदना के  शिखर पर 
औंधा पड़ा मौन ही है सिसकता |

हमारे प्यारे बापू जी



बापू जी बापू जी , चश्मे वाले बापूजी |
सादा जीवन उच्च विचार , ऐसा  बोले  बापूजी |
किस किसने  इनको अपनाया ये तो न जाने बापूजी |
चश्मा ,  लाठी, धोती , कुर्ता हर दम  पहने बापूजी |
दुबली पतली थी काया पर बात में था दम उनके जी |
बुरा न कहो , बुरा न सुनो , बुरा न देखो 
हरदम ऐसा ही  बोले बापूजी |
कितने सरल अंदाज़ में पाठ पढा  गए बापूजी |
और सारे संसार में अपना नाम कर गए बापूजी |
इतने  मुश्किल काम को भी आसां बना गए बापूजी |

आज फिर उनके चरणों में हम शीश नवाए मिलके जी |