होली है



आओ सैयां खेले होरी 
तुझ संग बंधी है प्रीत की डोरी 
लाल - पीला और नीला - पीला 
तुझ जैसा है ये रंग सजीला 
तेरे बिन फीकी ये होली 
चल मिलके हम खेले होली 
हर तरफ रंगों की बोली 
सजी हुई हर तरफ है टोली 
पानी भर - भर के पिचकारी
भीगा रहें सबकी है चोली
दिल में रहें न गिला अब कोई
बोल दे सबसे मीठी बोली
चल मिलकर खाएं भंग की गोली
बोले सब बम - बम की बोली
चल सैयां मिलकर खेलें होली
हर दिशा खिल उठे सजीली |

सभी दोस्तों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं :) ♥

दस्ताने - दर्द


Photo: जुर्म मुझसे बस इतना सा हो गया ...
गरीब के घर , मैं पैदा हो गया |
शिकायत करू भी तो किससे करू जाकर , 
खुदा भी तो अब अमीरों का गुलाम हो गया |
न सुनता है मेरी , न अपनी कहता है ,
वो मेरी जिंदगी का हिस्सा बनके रह गया |
जब मिलेगा वो , तो उससे पूछेंगें फुर्सत में ...
बता इस जन्म में मुझसे ऐसा क्या जुर्म हो गया |

शायद जुर्म मुझसे फक्त , इतना सा हो गया
गरीब माँ की कोख में , मेरा जन्म था हो गया
अरमानों का काफिला , तभी से था ठहर गया
शिकायतों के दौर का , सिलसिला भी थम गया
क्या अब खुदा भी , अमीरों का गुलाम हो गया ?
या फरियादों में भी , अब कोई टैक्स है लग गया
गरीबी मेरी जिंदगी का , हिस्सा बन गया
सरपट भागती दुनिया से , मैं पिछड गया
घर द्वार से मेरा , नामों निशाँ है मिट गया
रिश्तों से भी मैं , दूर होता चला गया
इंसानी फितरत से , जब मैं बेजार हो गया
अब  जाकर फिर मैं , खुद में ही सिमट गया
जब मिलेगा वो , तो उससे पूछुंगी फुर्सत से
बता बीते जन्म में , मुझसे ऐसा क्या पाप हो गया ?

इंतज़ार



वादा निभाने की खातिर मत आना |
वादा निभाने वाले अहम को साथ रखते हैं |
दंभ और अहंकार रूप हैं इसके ...
ये अक्सर दिल तोड़ जाते हैं ,
और उदासी में अकेला छोड़ जाते हैं |
मेरी चाहत की गहराई इतनी कम नहीं
ये दिए की लौ से भी ऊँची है |
जब दिल अकेले में मुस्कुरा दे ...
जब आँखों से बुँदे खुद गिर आये ...
तो आ जाना .......
मैं दरवाज़े में दस्तक का इंतज़ार करुँगी |

छटपटाता मौन



प्रकृति का प्रकृति से जुडाव ,
नहीं अब नहीं रहा ये सब भाव ,
भीतर ही भीतर बड़ा कलरव है 
घनी भीड़ में सिर्फ शोर ही शोर है
भीतर से असहज ....
बाहर सभ्य होने की दौड है
सब कुछ है सही , पर फिर भी व्यर्थ
इतना दर्द , सब तरफ मौन ही मौन है
इतना असर , पता नहीं वजह कौन ?
शब्द जितने सहज , मौन उतना कठिन
द्वेष , इर्षा , क्रोध , मद , मोह और मैं
हर तरफ सिर्फ इसी का है बोल
जब जीवन ही रसहीन हो तो ...

गीत कैसे बने ...साज कोई कैसे छेड़े |