दस्ताने - दर्द


Photo: जुर्म मुझसे बस इतना सा हो गया ...
गरीब के घर , मैं पैदा हो गया |
शिकायत करू भी तो किससे करू जाकर , 
खुदा भी तो अब अमीरों का गुलाम हो गया |
न सुनता है मेरी , न अपनी कहता है ,
वो मेरी जिंदगी का हिस्सा बनके रह गया |
जब मिलेगा वो , तो उससे पूछेंगें फुर्सत में ...
बता इस जन्म में मुझसे ऐसा क्या जुर्म हो गया |

शायद जुर्म मुझसे फक्त , इतना सा हो गया
गरीब माँ की कोख में , मेरा जन्म था हो गया
अरमानों का काफिला , तभी से था ठहर गया
शिकायतों के दौर का , सिलसिला भी थम गया
क्या अब खुदा भी , अमीरों का गुलाम हो गया ?
या फरियादों में भी , अब कोई टैक्स है लग गया
गरीबी मेरी जिंदगी का , हिस्सा बन गया
सरपट भागती दुनिया से , मैं पिछड गया
घर द्वार से मेरा , नामों निशाँ है मिट गया
रिश्तों से भी मैं , दूर होता चला गया
इंसानी फितरत से , जब मैं बेजार हो गया
अब  जाकर फिर मैं , खुद में ही सिमट गया
जब मिलेगा वो , तो उससे पूछुंगी फुर्सत से
बता बीते जन्म में , मुझसे ऐसा क्या पाप हो गया ?

17 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत शानदार उम्दा प्रस्तुति,,,

recent post: बसंती रंग छा गया

रविकर ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति आदरेया -
शुभकामनायें ||

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

ek dard aisa bhi ...uff

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुंदर
क्या कहूं,

expression ने कहा…

आह....
मार्मिक रचना...


अनु

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

वाह!
आपकी यह प्रविष्टि दिनांक 18-02-2013 को चर्चामंच-1159 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

Ramakant Singh ने कहा…

इंसानी फितरत से , जब मैं बेजार हो गया
अब जाकर फिर मैं , खुद में ही सिमट गया
जब मिलेगा वो , तो उससे पूछुंगी फुर्सत से
बता बीते जन्म में , मुझसे ऐसा क्या पाप हो गया ?

बहुत ही खुबसूरत भाव पूर्ण रचना मन को छूती

रविकर ने कहा…



मार्मिक-

शुभकामनायें आदरेया ।।

ताने हों या इल्तिजा, नहीं पड़ रहा फर्क ।

पत्थर के दिल हो चुके, सह जाता सब जर्क ।

सह जाता सब जर्क, नर्क बन गई जिंदगी ।

सुनते नहिं भगवान्, व्यर्थ में करे बंदगी ।

सत्ता आँखे मूंद, बनाती रही बहाने ।

चूस रक्त की बूंद, मार के मारे ताने ।।

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

Asha Saxena ने कहा…

बहुत गहरे विचार अभिव्यक्त किये है |
आशा

सदा ने कहा…

मन को छूती प्रस्‍तुति

Anita (अनिता) ने कहा…

मार्मिक..... :(
~सादर!!!

Anita (अनिता) ने कहा…

मार्मिक..... :(
~सादर!!!

Hukumpal Singh ने कहा…

बहुत मार्मिक...........................

DINESH PAREEK ने कहा…

क्या खूब कहा आपने वहा वहा बहुत सुंदर !! क्या शब्द दिए है आपकी उम्दा प्रस्तुती
मेरी नई रचना
प्रेमविरह
एक स्वतंत्र स्त्री बनने मैं इतनी देर क्यूँ

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मार्मिक स्थितियाँ..

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बहुत मार्मिक रचना, शुभकामनाएँ.