सिर्फ एक आह


वो भाग गई , वो भाग गई 
हम न कहते थे वो भाग जायेगी |
इस शोकाकुल शब्द ने जगा दिया हमें 
कितने दुःख कि बात थी 
पर उस शोर में दर्द नहीं .....
एक खुशी थी , एक मज़ा था 
किसी के दर्द में खुश होने की खुशी 
पता चला बस्ती से एक लड़की लापता है 
पर कोई नहीं जानता कि वो कहाँ है ?
हर निगाह उसे खोज रही है
उसके घर कि ख़ामोशी ...
उसके खो जाने का बहुत बड़ा सबूत है |
हाँ रपट लिखवाई गई है |
कार्यवाही भी चल रही है ,
पर मुन्नी का कोई पता नहीं |
घर वाले इस बात से बेखबर नहीं हैं  |
मुन्नी के दर्द को उन्होंने करीब से महसूस किया है |
उसके आगे घर के हालात कभी छुपे कहाँ थे ?
एक - एक निवाले के लिए इंतज़ार करना
कभी खाना , कभी भूखे सो जाना
हर सुबह जीना और हर रात मर जाना
पिता को अपने ब्याह कि फ़िक्र में ...
पल- पल मरते देखा था उसने
हाँ सच कहते थे लोग कि वो गाँव से भाग गई
पर सच इतना नहीं है ...
सच तो ये है कि वो सिर्फ गांव से ही नहीं
बल्कि इस जहान से भाग गई थी ...
अपने नाम का निवाला कम कर ...
पिता की चिंता को कम करने के लिए |

13 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मार्मिक ... काश समाज इन बातों को रोक सके ... साहस का सहारा ले सके ...

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत - बहुत शुक्रिया दिगम्बर नासवा जी |

Reena Maurya ने कहा…

बेहद मार्मिक अभिव्यक्ति ...

Minakshi Pant ने कहा…

तहे दिल से शुक्रिया @ रीना मौर्या जी |

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दुख से भला कहाँ तक कोई भाग सकता है।

Ramakant Singh ने कहा…

पलायन जीवन से या मुक्ति उस एक पल से जो असह्य हो जाता है ये कैसी विडंबना ?

poonam ने कहा…

bhavpurn

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

beautiful.

सुशील ने कहा…

बहुत सुंदर रचना :

वो भागती है
अपने आप से भी
किसी को खबर
भी नहीं होती
भाग जाती है जब
बस एक खबर
हो जाती है !!

"अनंत" अरुन शर्मा ने कहा…

आपकी इस रचना ने अन्दर से झकझोर दिया है. बधाई स्वीकारें

सदा ने कहा…

मन को छूती हुई प्रस्‍तुति ... आभार

घनश्याम मौर्य ने कहा…

सदियों पुराने मुद्दे पर एक अलग तरीके से चोट की है आपने।

Minakshi Pant ने कहा…

सभी सम्मानित मित्रों का तहे दिल से शुक्रिया |