प्रकृति प्रेरणा


निखरा कैसा आज गगन , 
झिलमिल करते  यह सूरज किरण |
गति डोल रहे हैं यह खग गन 
ध्वनी  से निकलता ------ जन गन मन ||
यह भरे हुए फूलों का बन 
ऊँचे - ऊँचे हैं ये कानन |
है राष्ट्र प्रेम इनके भी मन 
कह रहे भूमि पर दे दो तन ||
हैं उच्च शिखर में जो हिम गण
दे रहे प्रेरणा यह प्रतिक्षण |
क्या हुआ अगर मिटते  हैं ...हम ,
सुविधा पा लेते अपने जन ||
यह वक्र घाटी में बहता जल ,
कहता है हमसे उछल - उछल |
यूँ पड़े हुए क्यु गति ...टल |
यह तो है वीरों का जन्मस्थल ||

15 टिप्‍पणियां:

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

यह तो है वीरों का जन्मस्थल ||

बेहद सुंदर कल्पना ..! उच्च भाव ..!! प्रशंसनीय ....!!!

वाणी गीत ने कहा…

प्रकृति प्रेम के साथ वीरों को भी याद रखा ...
बेहतरीन !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

प्रकृति से प्रेरणा देती अच्छी रचना

Jignesh ने कहा…

Nice thought!!

neha sharma ने कहा…

great post

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Bahut Sunder Vichar...

Jyoti Mishra ने कहा…

I missed many of your posts as I was disconnected from web.

Loved the imagery of the poem !!

संजय भास्कर ने कहा…

प्रेरणा देती अच्छी रचना

संजय भास्कर ने कहा…

 अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत खूब।

anu ने कहा…

sundar shabdo ki rachna......bahut khub

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 20/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

bahut sunder man ke bhaav ...

रेखा ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत रचना ....

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

यह भरे हुए फूलों का बन
ऊँचे - ऊँचे हैं ये कानन |
है राष्ट्र प्रेम इनके भी मन
कह रहे भूमि पर दे दो तन

सुन्दर संयोजन... उत्तम भाव...
सादर...