इंसानियत का परिचय

हमने तो जहां तलख भी नज़र डाली है ,
जिंदगी हर पल  बेजार ही नज़र आई है !
इंसा - इंसा को सीडी भर फकत समझता है ,
और अपने मतलब के लिए ही बस जीता है !
हमने तो हर हाल मै प्यार ही प्यार बांटा है ,
पर अंजाम कुच्छ भी नज़र नहीं आया है !
लोग तो बस मतलब के लिए ही जीते हैं ,
काम खत्म होते ही अपनी राह निकल लेते  हैं !
क्या यही इंसानियत का परिचय है ,
हम तो अब तक ये न जान पाए हैं !
कोंन कीससे क्या पाना चाहे  है ,
क्यु  दिल की बात दिल दबाये चले  जाये  है !
जो बात आपस की है उससे क्यु न कह पाए है ,
जिससे आपस की दुरी को और भी कम कर पाए है  !
इंसा का - इंसा से  वही पर परिचय हो जाता ,
उसके सफ़र का अंत भी शायद ख़तम हो जाता ?

1 टिप्पणी:

Krishna Baraskar ने कहा…

लोग तो बस मतलब के लिए ही जीते हैं ,
काम खत्म होते ही अपनी राह निकल लेते हैं !