घमंड किस बात का

हम किसका गुमान करते हैं ?
ग़ोर से देखें  तो यहाँ .................
कुछ  भी तो अपना नहीं !
रूह भी तो खुदा की बख्शी नेमत है !
जिस्म है की मिट्टी  की अमानत है !
क्यु न एक जुट होके रहते हम .........
एसी क्या चीज़ है जिसपे गर्व करते हम ?
दोलत  से क्या कुछ  खरीद पाएंगे ?
क्या इसीके बलबूते पर दूर तल्ख़ जायेंगे ! 
इसका तो आज यहाँ ..........
कल ...कही और ठिकाना है  !
ये मत भूलो,  इसे आज नहीं तो कल ........
हर घर घर मै  जाना है !
इसे पकड़ के न रख पाएंगे हम ,   
फिर इंसा होके इंसा को ठुड़ते नज़र आयेंगे !
तो फिर आज ही से ये वादा..........
 खुद से करते हैं हम , 
इंसा  हैं तो इंसा की तरह ही रहते हैं !
कभी गुमान के फेरे मै न ही पड़ते हैं !

3 टिप्‍पणियां:

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

very nice

vats gunprakash ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
vats gunprakash ने कहा…

nice topic