नई सुबह


दूर गगन में सूरज चमका ,
नई सुबह है आने को |
तम हटेगा , धुंद हटेगी ,
नया प्रकाश है छाने को |

देखो किरणों कि ये छटा ,
पेड़ों पर है ठहर जाने को |
सर्दी कि ठिठुरती बेला को ,
फिर से है गरमाने को |

गांव कि गोरी छम - छम करती ,
चली पनघट में लेने पानी को |
सूरज कि किरणों से बचती ,
आँचल से  लगी मुंह छुपाने को |

सागर कि लहरें भी लगी अब ,
अपना करतब दिखाने को |
लगी  किनारों से टकराने ,
अपना आस्तिव बतलाने को |

चिड़िया अम्बर में उड़  निकली ,
आज़ादी का आभास दिलाने को |
मछुवारों कि टोली  चल निकली ,
अपना कर्तव्य निभाने को |



9 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

सागर कि लहरें भी लगी अब ,
अपना करतब दिखाने को |
लगी किनारों से टकराने ,
अपना आस्तिव बतलाने को |nai ubah phir pyaari hai, aashaaon se bhari

सागर ने कहा…

bhaut hi sundar nayi subah hogi....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

नई सुबह का मधुरिम प्रकाश।

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

बहुत सुन्दर

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर आह्वान

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बहुत प्यारी रचना, नयी सुबह आएगी. शुभकामनाएं.

शिखा कौशिक ने कहा…

चिड़िया अम्बर में उड़ निकली ,
आज़ादी का आभास दिलाने को |
मछुवारों कि टोली चल निकली ,
अपना कर्तव्य निभाने को |

bahut sundar v prerak rachna .

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

चिड़िया अम्बर में उड़ निकली ,
आज़ादी का आभास दिलाने को |

-आज़ादी की सही परिभाषा .....

prerna argal ने कहा…

आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (५) के मंच पर शामिल की गई है /आप ब्लोगर्स मीट वीकली (५) के मंच पर आयें /और अपने विचारों से हमें अवगत कराएं /आप हिंदी की सेवा इसी तरह करते रहें यही कामना है /प्रत्येक सोमवार को होने वाले
ब्लोगर्स मीट वीकली मैं आप सादर आमंत्रित हैं /आभार /
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ब्लॉगर्स मीट वीकली (5) Happy Janmashtami & Happy Ramazan