
महकती सी जिंदगी की किताब पर |
गुनगुनाते सुरों के इस साज़ पर |
एक गीत गा रही है जिंदगी |
कुछ खास सुना रही है जिंदगी |
सुबह का सूरज यहाँ पर चढ़ रहा |
चाँद की रौशनी को मद्धम कर रहा |
रात अपने आप को समेट कर ,
सुबह के स्वागत में जैसे लग रहा |
किसी के मिलन की बेला आ रही |
किसी को विरह जैसे बुला रही |
एक क्षण जिंदगी जैसे हंसा रही |
एक क्षण जिंदगी जैसे रुला रही |
रोज़ फूल कर रही श्रृंगार है |
रोज़ धुल उसको नहला रही |
रोज़ पतंगे दीप पे हैं मिट रहे |
एक मीत पे असंख्य मीत मिट रहे |
धर रही है उम्र कामना का शरीर |
टूट रही है किसी के सांसो की लड़ी |
एक घर बसा रही है जिंदगी |
एक घर मिटा रही है जिंदगी |
खुश है अगर जिंदगी यौवन लिए हुए |
रो रहा है बुडापा सांसो को समेटे हुए |
एक पल जैसे सुला रही है जिंदगी |
एक पल जैसे हंसा रही है जिंदगी |
जा रही बहार एक सवेरा लिए हुए |
आ रही है रात जलती शमा लिए हुए |
एक बार जो लेके जाती है जिंदगी |
दुसरे पल देके भी तो जाती है जिंदगी |
2 टिप्पणियां:
......महकती सी जिंदगी की किताब पर..........
गुनगुनाते सुरों के इस साज़ पर ........
एक गीत गा रही है जिंदगी !
कुछ खास सुना रही है जिंदगी !
.
बहुत अच्छी पंक्तियाँ लगी.
अभिवादन है.
शुक्रिया दोस्त !
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