
खुद को इतने करीब से !
उसकी पारखी नजरो ने न जाने
केसा ये कमाल कर दिया !
हमने तो अभी अपनी ज़मी
मै न पहचान बनाई थी !
उसने तो हमारी गिनती
तारो मै लाकर ही कर दी !
वक़्त जेसे -जेसे अपनी
आग़ोश मै भरता चला गया !
हमारी पहचान मै और वो ............
इजाफा करता चला गया !
कितना प्यारा था वो शख्श
जो हमे इतना प्यार करता था !
हमे खबर भी न हुई
और वो दिल मै उतरता चला गया !
कितने प्यारे बन गये थे
ये रिश्ते बिना किसी चाहत के !
और हम एक दुसरे को
सम्मान देते ही चले गये !
न जाने ये दोस्ती का सफ़र
कब तलक यु ही चलेगा !
न जाने कब वो हमे तारो से ............
फिर सूरज की रौशनी कहेगा ?
2 टिप्पणियां:
न जाने ये दोस्ती का सफ़र
कब तलख यु ही चलेगा !
न जाने कब ............
.
.
धार तेज़ होती जा रही है.......
बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ ....
शुभकामनाएं!!
शुक्रिया दोस्त !
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