क्यु हो इंतजार


कौन  जीता है किसी और की खातिर |
सबको अपनी ही बात पर रोना आया |
बूढी आँखों में  न जाने किसका इंतजार हैं 
खुद को सँभालने की एक नाकाम  कोशिश
गालों तक लुढकते हुए  आंसूं
दिल में दर्द को झुपाने की लाख कोशिश
आवाज़ को बनाये रखने का झूठा प्रयास
पर उम्र तो सब कुछ ब्यान कर देता है
विश्वाश ही है जो अभी भी जिन्दा  है
दर्द एसा की एक टीस की तरह ...
कब सैलाब बनकर सुनामी का रूप ले ले |
कौन  झुकना चाहता है ?
सब अपने मद मैं चूर
सबका अपना - अपना अहम्
कौन किसके साथ है ?
सबका अपना -अपना कारवां
अपनी अपनी मंजिले ...
पर ये जर्र - जर्र शरीर
कहाँ ये सब जानता  है ?
बूढ़े कन्धों को तो सहारे की चाह
किसी की हमदर्दी की आस
अब भी है , की काश वो लौट आये
वो छुहन , वो स्पर्श , वो एहसास
फिर से पाने की नाकाम  चाह
अपनों से कुछ प्यार पाने की उम्मीद
पर किसके पास है इतना समय ?
न जाने ये इंतजार कब खत्म होगा ?
काश वो भी ये सब जान जाते
कि... समय ही किसके पास है |

12 टिप्‍पणियां:

योगेन्द्र पाल ने कहा…

मन के भावों को खूब उकेरा है आपने

रश्मि प्रभा... ने कहा…

jane kahan gaye wo din ...

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

man ko chhune vali rachna

साहित्यधारा ने कहा…

बहुत सुन्दर

सारा सच ने कहा…

अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

Rahul Singh ने कहा…

उम्‍मीदें अनंत होती हैं.

ज्योति सिंह ने कहा…

bheeg gaya man ,budhapa bahut akela hota hai ,aese main hame dhyaan bataye rahna chahiye unka ,sundar .

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अपने खांचों में दूसरे को समेटने का प्रयास।

Rakesh Kumar ने कहा…

मार्मिक,करुणामय ,हृदयस्पर्शी प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.
आप मेरे ब्लॉग पर आयीं ,इसके लिए भी आभार.
कृपया एक बार फिर आयें, नई पोस्ट आज ही जारी कर दी है.रामजन्म का बुलावा है,भूलिएगा नहीं.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

यही हाल है आज के दौर में....

PK Sharma ने कहा…

Minakshi G kya baat hai badi bhavok hokar likha hai
kasam se aankhen bhar aayi

विजय रंजन ने कहा…

फिर से पाने की नाकाम चाह
अपनों से कुछ प्यार पाने की उम्मीद
पर किसके पास है इतना समय ?
न जाने ये इंतजार कब खत्म होगा ?
काश वो भी ये सब जान जाते
कि... समय ही किसके पास है |
bahut acchi kavita..,.