बेखबर बचपन

कितना खुबसुरत  है ये बचपन 
खुद से ही बेखबर |
न कोई सोच , न ही विचार |
न कोई शिकवा , 
न ही कोई शिकायत |
अपनी ही दुनिया में मग्न ,
न कोई  चाहत , न ही बगावत |
आज लड़ना , कल वही अपना |
हर किसी से बेखबर , 
सिर्फ अपनी मंजिल का जश्न |
खुद से सवाल , खुद ही जवाब |
सब कुछ पाने की चाह ,
न मिले तो भी न कोई बात |
मस्त गगन में उड़ते पंछी जैसा ,
स्वछंदता से बस उड़ते रहना |
हर सुबह नए सपनों में जागना |
रोज़ उसे हसीं रंगों से रंगना |
हाँ यही तो है वास्तविक जीवन  |
हर हाल में मस्त , हर बात से बेखबर |

26 टिप्‍पणियां:

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

jeevan ke sabse sunahre pal "Bachpan" duniya se be-khabar

रश्मि प्रभा... ने कहा…

tabhi to yah geet zubaan per hota hai... bachpan ke din bhi kya din the udte firte titli ban

nivedita ने कहा…

बचपन का महत्सव बस परिपक्व होने के बाद ही समझ आता है :) यही इसकी खासियत भी है ...

निर्मला कपिला ने कहा…

बचपन याद दिला दिया। धन्यवाद।

Rakesh Kumar ने कहा…

बच्चे ..मन के सच्चे ...
सबकी आँखों के तारे
ये वो नन्हे फूल हैं जो भगवान को लगते प्यारे

बहुत सुन्दर बचपन की खूबसूरती को दर्शाती आपकी अभिव्यक्ति के लिए बहुत बहुत आभार.

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

जाड़े की शाम
धुल धूसरित मैदान
बगल की खेत से
गेहूं के बालियों की सुगंध
और मेरे शरीर से निकलता दुर्गन्ध !
तीन दिनों से
मैंने नहीं किया था स्नान
ऐसा था बचपन महान !

Rakesh Kumar ने कहा…

आप मेरे ब्लॉग पर अभी तक क्यूँ नहीं आईं .
अपनी व्यस्तता से थोडा समय निकाल कर आइयेगा,प्लीज़.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

यही तो बचपन का उन्माद है।

विजय रंजन ने कहा…

bachpan ke din bhula na dena....sachmuch ur chala man dur kahin aaksh mein...yadon ke dhundh mein khoya bachpan dikh raha saaf saaf...

dil ko baccha banae ko dhanyavaad.

Rahul Singh ने कहा…

बचपन के दिन भी क्‍या दिन थे.

सतीश सक्सेना ने कहा…

इनसे अच्छा कोई नहीं...... कुछ नहीं.....सच्ची !
शुभकामनायें !

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

बचपन के दिन भी क्या दिन थे...

मनोज कुमार ने कहा…

खूबसूरत बचपन की मनमोहक तस्वीर\

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बचपन को बस बचपन होता है...
एकदम अनोखा...

udaya veer singh ने कहा…

kisi manishi ne kaha hai "bachpan parmatma ke karib hota hai " sashakt saral shabdon men mahkata srijan ,marmik laga .aabhar ji /

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

yahi to bachpan ki pahchaan hai. sunder abhivyakti.

अजय कुमार ने कहा…

सच्चा आनंद

संगीता पुरी ने कहा…

इसलिए तो फिर कभी बचपन लौटकर नहीं आता !!

Kailash C Sharma ने कहा…

बचपन जितना अपने आप में ख़ूबसूरत है, उतना ही वह अपने आसपास भी खुशियाँ बिखारने में सक्षम है. केवल बचपन ही अलौकिक नहीं बल्कि उसका साथ भी हमें फिर से बचपन में ले जाता है.

anupama's sukrity ! ने कहा…

bachche man ke sachche ....
sunder kavita ...

एम सिंह ने कहा…

बहुत तारीफ सुनी है आपकी... लेकिन लगता है कि बहुत कम सुनी है..
शानदार भावों के साथ शानदार शब्द
मेरी नई पोस्ट देखें
मिलिए हमारी गली के गधे से

कविता रावत ने कहा…

bachpan tabhi to baar baar yaad aata hai... bachpan kee yaad taji huyee...
aabhar

sushma 'आहुति' ने कहा…

Mere dil k kisi kone me,ek masum sa bachha h,bado ki dekh kar duniya,
bada hone se dar lagta h..

देवेन्द्र ने कहा…

बहुत सुन्दर,अभिव्यक्ति मीनाक्षी जी। साधुवाद।

Minakshi Pant ने कहा…

मैं आज इतने सारे दोस्तों को अपने ब्लॉग में पाकर धन्य हो गई |
मैं अपने सभी प्यारे दोस्तों का तहे दिल से शुक्रिया करना चाहूंगी की आपने अपना कीमती वक़्त निकल कर मेरी रचना में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की | बहुत - बहुत शुक्रिया दोस्तों |