आस फिर भी है बाकि


इतना डर
इतनी बैचैनी
क्यु डरती हो ?
किससे डरती हो ?
यही तो है वो हिंदुस्तान
जिसमें ऊँची - ऊँची
पर्वतमालाएं बिखरी पड़ी हैं |
बर्फ से ढकी चोटियाँ
कल - कल बहते झरनें
सब अपनी जगह पर हैं |
फूलों से लदी वादियाँ
हाथ फैलाये तेरे दीदार को खड़ी हैं |
पर तुम्हारी आँखों का दर्द
इन्हें धुन्दला कर रहा है |
देश में फैली ये दहशत
आँखों की जुबां से बता रहा है |
दंगों से आहात जन - जन की
दास्ताँ सुना रहा है |
की सच में
बेख़ौफ़  नहीं हैं गलियां |
खेत खलियानों में
हर जगह
डरे सहमें से हैं लोग |
तुम्हारा डर हवाओं से
कुछ इस तरह से कह रहा है |
सुनो , देखो मुझे यूँ न छुओ
तुम्हारी छुअन भी
मुझे डराती है
तेरे साथ न होने का
एहसास सा दिलाती है |
फूलों की खुशबूं में भी
अब बारूद की महक आती है |
इन आँखों को
आज भी उसी एहसास का
इंतज़ार है |
सबको अपना हक मिले |
सबको अपना रूप मिले |
सारी  प्रकृति खुशनुमा हो जाये |
इन सब एहसासों के बीच
आज भी आस बाकि है |
मैं जानती हूँ
वो दिन फिर से
पलट कर आएगा |
जब हवाओं का स्पंदन
मुझे फिर से
मदहोश कर जायेगा |
सारा जन जाग उठेगा
ये मेरा देश मेरा देश गायेगा |


16 टिप्‍पणियां:

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

MEENAKSHI JI,

SACH KAHA AAPNE

" AAS ABHI BAKI HAI "

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत खूब! बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना..

संजय भास्कर ने कहा…

हर शब्‍द बहुत कुछ कहता हुआ, बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के लिये बधाई के साथ शुभकामनायें ।

mahendra srivastava ने कहा…

सबको अपना हक मिले |
सबको अपना रूप मिले |
सारी प्रकृति खुशनुमा हो जाये |
इन सब एहसासों के बीच
आज भी आस बाकि है |

सुंदर भाव अच्छी रचना।
बधाई

मदन शर्मा ने कहा…

देखो मुझे यूँ न छुओ
तुम्हारी छुअन भी
मुझे डराती है
तेरे साथ न होने का
एहसास सा दिलाती है |
फूलों की खुशबूं में भी
अब बारूद की महक आती है |

आपकी नजरिये से पूरी तरह सहमत |
गहन बात कहती हुई अच्छी रचना!

मदन शर्मा ने कहा…

समाज की कडवी सच्चाई को बहुत संजीदगी पूर्वक पेश करने में सफल रही हैं आप !

Jyoti Mishra ने कहा…

agree .. there is still hope..
and as ppl say " aas par duniya kayam ha"

Nice read !!!

sushma 'आहुति' ने कहा…

बिलकुल सही कहा आपने... बहुत ही सुंदर भावो से रची रचना....

anu ने कहा…

सुंदर भावो के साथ ...मन के भावो की प्रस्तुति

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हम आस लगाये जाते हैं,
वे लाश बिछाये जाते हैं।

मनोज कुमार ने कहा…

इस रचना के भाव अच्छे लगे।

संध्या शर्मा ने कहा…

इन सब एहसासों के बीच
आज भी आस बाकि है ...

जब तक सांस है तब तक आस है, लेकिन बहुतों की ये आस तो सांस के साथ टूट गई देखते हैं, क्या होता है हमारी आस का...
आपकी आस से पूरी तरह सहमत हूँ...
बहुत अच्छी रचना...

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना..मै यहाँ पहली बार आई अच्छा लगा ....धन्यवाद

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

सकारात्मक सोच - वो सुबह कभी तो आयेगी
जब-
हम होंगे कामयाब .

Sunil Kumar ने कहा…

सकारात्मक सोच सुंदर भाव बधाई .....

संजय भास्कर ने कहा…

मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
' नीम ' पेड़ एक गुण अनेक..........>>> संजय भास्कर
http://sanjaybhaskar.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html