मन



मन के आँगन में
बहारों ने डाला डेरा |

माली के चेहरे में
मुस्कुराहट का सवेरा |

प्यारी सी कली
कभी चंचल , कभी मौन
होकर है पलती   |

न छूना इसे
ये तो हररोज एक नए
रूप में है सजती   |

जब आने लगी बहारें
महकने लगा फिर गुलशन |

चिड़ियों की चहचहाहट
भंवरों का प्यारा गुंजन |

तितली का यूँ मचलना
बादल का फिर बरसना |

हिलोरे लेता हुआ सागर
कल - २  बहता नदिया का जल |

काली रात का  देख पहरा
चंदा का मुस्कुराना |

सूरज की प्यारी किरणें
हवा का मंद - मंद बहना |

फूलों की महकती खुशबु
सारे आलम का फिर ठहरना |

करवट लेता देखो  पल - पल
दर्द उठता है तब रह - रह

शांत लहरों में भी
ज्वार लाता है सागर   |

फूल खिलने से पहले ही
तब  उड़ा ले जाती है हवाएं |

सूरज की तेज तपन
जला देती है हर शय को  |

कभी चंचल कभी मौन रहकर
हर अंदाज़ में पलता ये मन |

कभी मेरा - कभी तेरा
देखो कहता है ये हरपल |

20 टिप्‍पणियां:

sushma 'आहुति' ने कहा…

मन के आँगन में
बहारों ने डाला डेरा |

माली के चेहरे में
मुस्कुराहट का सवेरा |बहुत ही सुन्दर पंक्तिया.....

वन्दना ने कहा…

मन की दशा का सुन्दर चित्रण्।

सदा ने कहा…

मनोभावों का सुन्‍दर संगम ...।

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुंदर रचना
कम ही ऐसी रचनाएं पढने को मिलती हैं,

babanpandey ने कहा…

वाह ....बहुत खूब /अति सुंदर

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज 03 - 11 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
_____________________________

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

बहुत ही सुन्दर पंक्तिया

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना

Pallavi ने कहा…

बहुत सुंदर मन के भावों को प्रकर्ति से जोड़कर बड़ी ही खूबसूरती के साथ शब्दों से सजाया है आपने!
समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

देवेन्द्र ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मन ऐसे ही सुन्दर बातें कहता रहे।

***Punam*** ने कहा…

कभी चंचल कभी मौन रहकर
हर अंदाज़ में पलता ये मन |

कभी मेरा - कभी तेरा
देखो कहता है ये हरपल |

क्या खूब....!
क्या खूब....!!

संगीता पुरी ने कहा…

ये मन होता ही ऐसा हैं ..
बहुत सुंदर !!

संगीता पुरी ने कहा…

ये मन होता ही ऐसा हैं ..
बहुत सुंदर !!

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri ने कहा…

मन के आँगन में
बहारों ने डाला डेरा |

माली के चेहरे में
मुस्कुराहट का सवेरा |.
बेहद कोमल भाव पूर्ण रचना.....सादर !!!

मनीष कुमार ‘नीलू’ ने कहा…

कभी चंचल कभी मौन रहकर
हर अंदाज़ में पलता ये मन |

कभी मेरा - कभी तेरा
देखो कहता है ये हरपल
bahut sundar..

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

bahut khoobsoorat chitran karti abhivyakti.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

khoobsoorat chitran aur abhivyaktiee

सागर ने कहा…

behad umda rachna...

RAMKRISH ने कहा…

मन के आँगन में
बहारों ने डाला डेरा |

माली के चेहरे में
मुस्कुराहट का सवेरा |

प्यारी सी कली
कभी चंचल , कभी मौन
होकर है पलती |

न छूना इसे
ये तो हररोज एक नए
रूप में है सजती |
bahut he sunderta k saath apne apne man k darpan ka chitran kiya ..waah waah Lajavaab...behtareeen kalaam Hai....Keep it up
Khuda kare aap us oonchayi ko chule jiski aapne kalpna ki hai....