क्या है ये सुकून



कैसी होती है ...ये सुकूने जिंदगी 
भूखे बच्चे को रोटी का निवाला 
खिलाकर देखो |
फिर भी न आये दिल में कोई अहसास ...
टपकते उसके आंसूंओं को
अपनों के साथ महसूस करके देखो |
मन जो महसूस कर रहा है

यही जिन्दगी का राज़ है
खुदा कि रहमत का 

ये जीता जागता कमाल है
मंदिर मस्जिद में जाने की
अब जरूरत ही न रही |
भूखे बच्चे के चेहरे में 

इबादते सुकून जो दिख गया |
फिर किसको खोजते फिर रहें हैं
हम भटक - २ कर दर - बदर ...
ऐसी सुकूने इबादत तो
हर गुजरते राह में देखो |
वो तो परख रहा है
हर रूप में पल - पल हमें |

बस उस अहसास को 
खुद में उतारकर कर देखो |

24 टिप्‍पणियां:

vidya ने कहा…

बहुत खूब...
सार्थक रचना.

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

bahut sundar

anju(anu) choudhary ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति

Reena Maurya ने कहा…

bahut hi behtarin
sarthak prastuti...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

यह एहसास हिलाकर रख देता है..

Rakesh Kumar ने कहा…

वाह!
शानदार मार्मिक और सार्थक अभिव्यक्ति.
सुन्दर प्रेरणा देती हुई.

आभार.

मेरे ब्लॉग पर आईएगा,मीनाक्षी जी.

वन्दना ने कहा…

वो तो परख रहा है
हर रूप में पल - पल हमें |
बस उस अहसास को
खुद में उतारकर कर देखो |

सही कहा मीनाक्षी जी यही होती है सच्ची इबादत ……किसी भूखे को रोटी खिला दो किसी जरूरतमंद के काम आ जाओ ………मानव सेवा ही भगवान की सेवा है और उसी मे खुदा बसता है…………प्रशंसनीय सार्थक रचना।

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 09/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

vandana ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव

Madhuresh ने कहा…

बहुत अच्छी अभिव्यक्ति मीनाक्षी जी , धन्यवाद! हलचल से पहली बार आना हुआ आपके ब्लौग पर, अच्छा लगा.

Anand Dwivedi ने कहा…

मंदिर मस्जिद में जाने कि
अब जरूरत कैसी ...
बच्चे के चेहरे में ही
इबादते सुकूं को देखो |

Anand Dwivedi ने कहा…

कमाल का जज्बा लिखा है आपने..इस स्तर पहुँच जाएँ हम तो फिर कहना ही क्या.

Pallavi ने कहा…

हकीकत में सुकूने जिंदगी
कैसी है होती ...
भूखे बच्चे को एक निवाला
खिलाकर देखो ...
कमाल का लिखा है आपने यही तो है खुदा की सच्ची इबादत। दिल छु गई आपकी यह रचना आभार...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सार्थक सन्देश देती खूबसूरत रचना ..

shalini ने कहा…

वाकई, जिनदगी का असली सुकून ददूसरों को खुशो देने में है....

Madhuresh ने कहा…

Bahut achhi rachna...

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

saarthak rachna!

Minakshi Pant ने कहा…

मैं अपने सभी दोस्तों का बहुत - बहुत शुक्रिया अदा करती हूँ |

संजय भास्कर ने कहा…

आपकी कृति प्रशंशनीय है

kshama ने कहा…

अब खुदा कि रहमत को
खुद में बसाकर देखो |
मंदिर मस्जिद में जाने कि
अब जरूरत कैसी ...
बच्चे के चेहरे में ही
इबादते सुकूं को देखो |
Wah! Kya gazab kee rachana hai!

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

अब खुदा कि रहमत को
खुद में बसाकर देखो |
मंदिर मस्जिद में जाने कि
अब जरूरत कैसी ...
बच्चे के चेहरे में ही
इबादते सुकूं को देखो |
bahut hi khoob soorat prastuti Menakshi ji shukoon kahi aur nahi dil ke bheetar hi hai bs dhoodhane ki jaroorat hai ....badhai sweekaren.

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत मार्मिक और सार्थक अभिव्यक्ति.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सार्थक संवेदनशील भाव, मीनाक्षी जी...

संध्या शर्मा ने कहा…

बस उस अहसास को खुद में उतारकर कर देखो...
सही कहा है आपने मीनाक्षी जी दूसरे के दुःख को महसूस करना और उसे दूर करने के लिए जो भी हो सकता है उसका प्रयत्न करने से बड़ा कोई सुख नहीं... सुन्दर रचना...