
पलपल दिल को अब करार आ रहा है |
जमाना हमको हमसे मिलवा रहा है |
कश पे कश प्यार का चढ़ाए जा रहे हैं |
दिल का गुबार धुएं में उडाये जा रहे हैं |
कश्तियाँ खोल दी सबने अपने खेमें से |
तूफानों से लड़ना उनको सिखला रहे हैं |
कितनी भी गमगिनियाँ हो राहे वफा में |
जश्ने जिंदगी अब सब मनाये जा रहें हैं |
कोई भी कर रहा हो जिंदगी से खिलाफत |
ये जानकार भी सब मुस्कुराये जा रहे हैं |
दिया है वादा जिंदगी को साथ निभाने का |
इसलिए हंस - हंसकर सब जिए जा रहे हैं |
9 टिप्पणियां:
कितनी भी गमगिनियाँ हो राहे वफा में |
जश्ने जिंदगी अब सब मनाये जा रहें हैं |
जीवन है ...जीना तो पड़ेगा...तो हंस के ही सही...
सुन्दर रचना .
यूं ही हँसते हुये जीना बेहतर ही ... अच्छी पेशकश
muskurana hi jindagi hai......
बढ़े चलें हम सब ऐसे ही, जीवन यूँ भरमायेगा...
कितनी भी गमगिनियाँ हो राहे वफा में |
जश्ने जिंदगी अब सब मनाये जा रहें हैं |
sahi kaha.....
kisko fursat hai jo ab gamgeen ho....
bas khushi hi manaayen...bhale hi vo kisi bhi tarah se mile...
कश्तियाँ खोल दी सबने अपने खेमें से |
तूफानों से लड़ना उनको सिखला रहे हैं ..
सुन्दर रचना.
बेहतरीन रचना देने के लिए आभार
कोई भी कर रहा हो जिंदगी से खिलाफत |
ये जानकार भी सब मुस्कुराये जा रहे हैं |
......क्या कहने, बहुत सुंदर
बेहतरीन के लिए आभार
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