अंदाज़ अपना - अपना

 

मुस्कान ही हमेशा कुछ नहीं कहती |
आवाज से हर बात बयाँ नहीं होती |
अहसास आंसूंओं से भी बयाँ होते हैं |
उनकी भी अपनी एक जुबाँ होती है |
मन को गुदगुदाती खुशी हो ...
या हताश के हों पल |
आशा की आहट हो या ...
फिर आकांशा की हो धमक |
भय से डरकर ...
या सुख में रमकर ...
हृदय की गोद से ...
एक बूंद आँखों में आती है |
आँखे तो हर हाल में छलक उठने को ...
बेकरार सी हो जाती हैं |
हाँ भाव ही तो है जो धरते हैं झट से
आँखों में एक तरल रूप |
जो आंसू बनकर हर बात बयाँ कर जाते हैं |

20 टिप्‍पणियां:

dheerendra ने कहा…

आँखों में एक तरल रूप |
जो आंसू बनकर हर बात बयाँ कर जाते हैं |
बहुत बढ़िया प्रस्तुति, सुंदर रचना,.....

MY RECENT POST.....काव्यान्जलि.....:ऐसे रात गुजारी हमने.....

sushma 'आहुति' ने कहा…

भावो को संजोये रचना......

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत ही बढ़िया


सादर

Rahul Singh ने कहा…

निराला अंदाज.

मनोज कुमार ने कहा…

भावनाओं को जब ठेस पहुंचती है तो ये तो रोके न रुकती है।

संध्या शर्मा ने कहा…

जी हाँ आंसुओं की भी अपनी एक जुबाँ होती है, गम हो या ख़ुशी झलक कर अपनी बात कह ही देते हैं...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आँसू बहुत बेवफा होते हैं ....सब कुछ बयान कर देते हैं ...खूबसूरत रचना

सदा ने कहा…

भावमय करते शब्‍द ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर भावप्रणव प्रस्तुति।
--
आज चार दिनों बाद नेट पर आना हुआ है। अतः केवल उपस्थिति ही दर्ज करा रहा हूँ!

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी पोस्ट कल 19/4/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें

चर्चा - 861:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

Ramakant Singh ने कहा…

मन को गुदगुदाती खुशी हो ...
या हताश के हों पल |
आशा की आहट हो या ...
फिर आकांशा की हो धमक |
भय से डरकर ...
या सुख में रमकर ...
हृदय की गोद से ...
एक बूंद आँखों में आती है |

आपको समर्पित .
अश्क आँखों में उतर आता है ,
बात हो प्यार या फिर दर्द की ..

Saras ने कहा…

अहसास आंसूंओं से भी बयाँ होते हैं |
उनकी भी अपनी एक जुबाँ होती है |....बहुत सही कहा मीनाक्षीजी ....और वह बोली मन में गहरे पैठ जाती है

Rakesh Kumar ने कहा…

बहुत समय पश्चात आप मेरे ब्लॉग पर आईं.
बहुत ही अच्छा लगा.

जानकर अफसोस हुआ कि आपके बेटे की
तबियत ठीक नही रही.आशा और दुआ
करता हूँ कि वह पूर्ण स्वस्थ और खुश रहे.

आपकी प्रस्तुति का अपना ही अंदाज होता है.
भावभीनी प्रस्तुति के लिए आभार.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

एहसास आँखों से जो उतरे , असली वही होते हैं .....

anju(anu) choudhary ने कहा…

आँसू ही इस दिल की और इस चहरे की कहानी बयां कर जाते हैं .....

ऋता शेखर मधु ने कहा…

आँसुओं में अपनी बात कहने की गजब की ताकत होती है...बहुत अच्छी लगी आपकी कविता...
मेरे ब्लौग पर आपका स्वागत है...आप आईं...आभार!

Dr.R.Ramkumar ने कहा…

मुस्कान ही हमेशा कुछ नहीं कहती |
आवाज से हर बात बयाँ नहीं होती |
अहसास आंसूंओं से भी बयाँ होते हैं
|उनकी भी अपनी एक जुबाँ होती है |


finely refined

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत सुंदर । मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । । धन्यवाद ।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच है एहसासों कों समझने के लिए आंसुओं की जुबान जानना जरूरी है ... लाजवाब भाव ...

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

होंठ जब सिल चुके होंगे निगाहें बोलेगी

सुंदर प्रस्तुति