उम्मीद बनाये रखें



कौन जाने , कब , कहाँ कोई , राह भूल जाएँ |
अपनी उम्मीदों की शमां को , जलाये रखिये |

बारिशे तो आती - जाती है तूफ़ान गुजर जातें हैं |
बस अपने पाँव को जमीं में जमा कर रखिये |

घर की ये बात है निकले न घर से बाहर |
आप बस खिड़की दरवाजों को बंद रखिये |

बैठे रहे कोहनी टिकाये गाल पर कब तलक |
इंतज़ार में दरवाजें की दस्तक का ख्याल रखें |

हालें दिल अब तो बयाँ हो जाता है आँखों में |
मैं न कहती थी पानी है आँखों को बंद रखिये |

देर तक गरजते बादलों का शोर सुनने पर  |
भीड़ का हिस्सा बने रहने से परहेज रखिये |

16 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरत गजल

Saras ने कहा…

कौन जाने , कब , कहाँ वो राह भूल जाएँ |
अपनी उमीदों की शमां को जलाये रखिये |

अच्छा लगा यह ज़ज्बा .....!!!

रविकर फैजाबादी ने कहा…

खूबसूरत

प्रस्तुति ।

expression ने कहा…

बहुत सुंदर गज़ल..............

हां ख्यालों में खोये रहें आप...और अनसुना ना कर दें उसकी दस्तक को......

सुंदर ख़याल.

अनु

dheerendra ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति,सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन ख्यालों की लाजबाब गजल ,...

MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बेहतरीन और सुन्दर गजल..

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बारिशे तो आती है तूफ़ान गुजर जातें हैं |
अपने पाँव को जमीं में जमा कर रखिये |
Bahut Sunder

पुरुषोत्तम पाण्डेय ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना.

Vivek Rastogi ने कहा…

बैठे रहे कोहनी टिकाये गाल पर कब तलक |
इंतज़ार में दरवाजें की दस्तक का ख्याल रखें

बेहतरीन

सदा ने कहा…

बैठे रहे कोहनी टिकाये गाल पर कब तलक |
इंतज़ार में दरवाजें की दस्तक का ख्याल रखें |

हालें दिल अब तो बयाँ हो जाता है आँखों में |
मैं न कहती थी पानी है आँखों को बंद रखिये |
वाह बहुत खूब ।

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी पोस्ट कल 19/4/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
http://charchamanch.blogspot.com
चर्चा - 854:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

sangita ने कहा…

खूबसूरत कविता जज्बातों को लिखने की अनुपम कला ।

कविता रावत ने कहा…

कौन जाने , कब , कहाँ वो राह भूल जाएँ |
अपनी उमीदों की शमां को जलाये रखिये |
...bahut badiya... gar ummed na ho to phir jindagi jandagi kahan rahti hain...
sundar sarthak prastuti..

Sushil Kumar Joshi ने कहा…

देर तक गरजते बादलों का शोर सुनने पर
भीड़ का हिस्सा बने रहने से परहेज रखिये

भीड़ ही तो नहीं छोड़ पाते हैं हम
भीड़ ही इसीलिये हो जाते हैं हम।

बहुत सुंदर !!!!

Ramakant Singh ने कहा…

देर तक गरजते बादलों का शोर सुनने पर |
भीड़ का हिस्सा बने रहने से परहेज रखिये |
beautiful insisting lines to think.

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

मन में उमड़तें भावों की सुन्दर प्रस्तुति!...आभार!