वो गुमनाम पल



सुनो , 
याद करो न 
वो फुर्सत का पल 
जब हम सिर्फ और सिर्फ 
एक दुसरे के लिए जियें हों ,
जब हमारे बीच में
हम दोनों की बातें हुई हों ,
सच कहूँ ,
मैं तो सोच - सोचकर
थक गई पर ...
याद ही नहीं आया वो पल
जब हम एक दुसरे के लिए जिए हों
हाँ कई बार साथ बैठना हुआ
पर हर बार बीच में ...
तीसरे का ही जिक्र रहा
साथ रहकर भी ...
बस फासला ही बना रहा ,
अब तुम ही याद दिलाओ न
कौन सा था वो लम्हा ?
जब हमने साथ बैठकर
चाँद को निहारा था |
उसकी खूबसूरती में ही सही
चंद किस्से सुनकर
कहकशा लगा था |
सुनो ,
मुझे बताना जरुर ,
मुझे उस पल का इंतजार है
उस पल को महसूस करने की चाह है ,
कई बार पढ़ा है , मैंने किताबों में ,
चन्दनी रात में प्रियतम के साथ बैठकर
चाँद का दीदार सुकून देता है ,
याद रखोगे न तुम , देखो , भूल न जाना
मुझे उस पल को अहसास में है बसाना |

9 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

क्या बात है, बहुत सुंदर , बहुत सुंदर

मीडिया के भीतर की बुराई जाननी है, फिर तो जरूर पढिए ये लेख ।
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Madan Mohan Saxena ने कहा…

हृदयस्पर्शी भावपूर्ण प्रस्तुति.बहुत शानदार भावसंयोजन .आपको बधाई

expression ने कहा…

वाह....
बेहद खूबसूरत एहसास....

अनु

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना।

Ramakant Singh ने कहा…

सुनो ,
मुझे बताना जरुर ,
मुझे उस पल का इंतजार है
उस पल को महसूस करने की चाह है ,
कई बार पढ़ा है , मैंने किताबों में ,
चन्दनी रात में प्रीतम के साथ बैठकर
चाँद का दीदार सुकून देता है ,
याद रखोगे न तुम , देखो , भूल न जाना
मुझे उस पल को अहसास में है बसना |

बहुत खुबसूरत भाव लिए रचना

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

याद रखोगे न तुम ,देखो भूल न जाना
मुझे उस पल को अहसास में है बसाना,,,,

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ,,,

recent post : मैनें अपने कल को देखा,

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

क्यों वो गुज़रा वक्त फिर से आ पाएगा ???

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही सुन्दर ,प्यारा अहसास और बेहद सुन्दर रचना..
:-)

kanchanlata chaturvedi ने कहा…

भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...