" खुदा का कहर "



धू - धू कर बेख़ौफ़ जलने लगी लाशें ,
धर्म के नाम पर जहां होती थी बातें |

अब बताओं न ...
क्या होती है ये श्रद्धा ?
किसे कहते हैं धर्म ?
मंदिर , मस्जिद की चौखट में बैठकर 
एक २ श्लोक पर पैसों की बोली ?
बेसहारों पर अत्याचार ?
सब गुनाहों का हिसाब तो है यही ...
फिर किस बात की है मनाही ?
सृष्टि का लिखा कब है बदलता
न खुदा है रोक सकता ...
न पैसा ही काम आता ...
फिर किस बात पर अकड़ना ?
क्यों बे - वजह का भटकना ?
कब कहता है खुदा
दूर चलकर मेरे पास आओ ?
कब कहता है खुदा
मुझ पर पैसा बरसाओ ?
अपनी - अपनी सहूलियत से
भगवान् को बेच हैं डालते ,
जब संभले न संभलता
तो " खुदा का कहर " नाम दे डालते |

14 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

जब संभले न संभलता
तो " खुदा का कहर " नाम दे डालते |

बहुत सुंदर सटीक प्रस्तुति,,,

Recent post: एक हमसफर चाहिए.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत सुंदर सटीक रचना,,,

RECENT POST: ब्लोगिंग के दो वर्ष पूरे,

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज शनिवार (29-06-2013) को कड़वा सच ...देख नहीं सकता...सुखद अहसास ! में "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सॉरी... लिंक गलत हो गया था!
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज शनिवार (29-06-2013) को कड़वा सच ...देख नहीं सकता...सुखद अहसास ! में "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

poonam ने कहा…

sunder aur sarthak rachna

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रकृति हमें जो रही साधती, आज बने अव्यवस्थित।

Yashwant Mathur ने कहा…

आपने लिखा....हमने पढ़ा
और लोग भी पढ़ें;
इसलिए कल 30/06/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
धन्यवाद!

संध्या शर्मा ने कहा…

सच है प्रकृति से कौन जीत सका है, उससे खेलने का परिणाम तो भुगतना ही है... सार्थक भाव... आभार

Ramakant Singh ने कहा…

फिर किस बात पर अकड़ना ?
क्यों बे - वजह का भटकना ?
कब कहता है खुदा
दूर चलकर मेरे पास आओ ?

beautiful expression with truth

Kuldeep Thakur ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति...


उत्तरांचल तबाही पर कुछ दोहे...



क्या माँ धारी देवी को नाराज करने के कारण केदारनाथ में भीषण तबाही हुई??


Aditi Poonam ने कहा…

सार्थक और सटीक.....

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बढिया, सामयिक प्रस्तुति
बहुत सुंदर

Madan Mohan Saxena ने कहा…

सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति

संजय भास्‍कर ने कहा…

प्रकृति से कौन जीत सका है

शब्दों की मुस्कुराहट पर ….माँ तुम्हारे लिए हर पंक्ति छोटी है

शब्दों की मुस्कुराहट पर .... हादसों के शहर में :)