
धू - धू कर बेख़ौफ़ जलने लगी लाशें ,
धर्म के नाम पर जहां होती थी बातें |
अब बताओं न ...
क्या होती है ये श्रद्धा ?
किसे कहते हैं धर्म ?
मंदिर , मस्जिद की चौखट में बैठकर
एक २ श्लोक पर पैसों की बोली ?
बेसहारों पर अत्याचार ?
सब गुनाहों का हिसाब तो है यही ...
फिर किस बात की है मनाही ?
सृष्टि का लिखा कब है बदलता
न खुदा है रोक सकता ...
न पैसा ही काम आता ...
फिर किस बात पर अकड़ना ?
क्यों बे - वजह का भटकना ?
कब कहता है खुदा
दूर चलकर मेरे पास आओ ?
कब कहता है खुदा
मुझ पर पैसा बरसाओ ?
अपनी - अपनी सहूलियत से
भगवान् को बेच हैं डालते ,
जब संभले न संभलता
तो " खुदा का कहर " नाम दे डालते |
13 टिप्पणियां:
जब संभले न संभलता
तो " खुदा का कहर " नाम दे डालते |
बहुत सुंदर सटीक प्रस्तुति,,,
Recent post: एक हमसफर चाहिए.
बहुत सुंदर सटीक रचना,,,
RECENT POST: ब्लोगिंग के दो वर्ष पूरे,
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज शनिवार (29-06-2013) को कड़वा सच ...देख नहीं सकता...सुखद अहसास ! में "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
सॉरी... लिंक गलत हो गया था!
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज शनिवार (29-06-2013) को कड़वा सच ...देख नहीं सकता...सुखद अहसास ! में "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
sunder aur sarthak rachna
प्रकृति हमें जो रही साधती, आज बने अव्यवस्थित।
आपने लिखा....हमने पढ़ा
और लोग भी पढ़ें;
इसलिए कल 30/06/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
धन्यवाद!
सच है प्रकृति से कौन जीत सका है, उससे खेलने का परिणाम तो भुगतना ही है... सार्थक भाव... आभार
फिर किस बात पर अकड़ना ?
क्यों बे - वजह का भटकना ?
कब कहता है खुदा
दूर चलकर मेरे पास आओ ?
beautiful expression with truth
सार्थक और सटीक.....
बढिया, सामयिक प्रस्तुति
बहुत सुंदर
सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
प्रकृति से कौन जीत सका है
शब्दों की मुस्कुराहट पर ….माँ तुम्हारे लिए हर पंक्ति छोटी है
शब्दों की मुस्कुराहट पर .... हादसों के शहर में :)
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