खामोश रात


ए रात की तन्हाईयों , मुझको लगा लो सीने से |
डर लगता है अब  , ख़ामोशी भरे इस मंजर से |

वस्ल की रात है  , राहत से बसर अब होने दो |
न रहे गिला कोई , धमकी का असर भी होने दो |

लोग कहते हैं दीवाना , इस पर भी यकीं करने दो |
न रहे तमन्ना अधूरी , उस पल से भी गुजरने दो |

है आग मुझमे भडकने की , कहाँ है  इंकार हमें |
न दो हवा इतनी , चलो अब थोडा  सँभलने दो |

वो चाहता है हमें , ये बात जो वो दावे से कहता है |
दो दर्द ऐसा , अहसासे बयाँ को महसूस करने दो |

जुदाई का है आलम तो , जुदाई का ही मंजर होगा |
है इतनी गुजारिश , सह लेने तक की हिम्मत  दो |

चांदनी रात जो है  तो ,  ख़ामोशी अच्छी नहीं लगती |
तारों से कुछ देर और , ठहर जाने की मोहलत ले लो |

महफ़िल सजे ऐसी , गिरफ्त में उसकी हम आ जाएँ  |
वक्त से चुराकर चंद लम्हे , चले जाने का वादा करलो |

26 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुंदर, क्या कहने.

जुदाई का आलम है , जुदाई का ही मंजर होगा |
है इतनी गुजारिश , सह लेने तक की हिम्मत दो |

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मन के गहरे भाव।

संतोष कुमार ने कहा…

Waah !! Kya khoobsurat rachna taareef ke liye shabd chote hain.

Aabhaar.

Amrita Tanmay ने कहा…

बहुत कुछ कहती है आपकी रचना |

Rajput ने कहा…

चांदनी रात जो है तो , ख़ामोशी अच्छी नहीं लगती |तारों से कुछ देर और , ठहर जाने की मोहलत ले लो...
खुमार में डूबी हुई रचना , बहुत खूब

रश्मि प्रभा... ने कहा…

जुदाई का है आलम तो , जुदाई का ही मंजर होगा |
है इतनी गुजारिश , सह लेने तक की हिम्मत दो |
waah, bahut hi badhiyaa

Maheshwari kaneri ने कहा…

मन के गहरे भाव को बहुत खुबसूरती से उजागर किया है..मीनाक्षी जी..

anju(anu) choudhary ने कहा…

waah ....
khusurat shabd rachna ke sath....bahut khub

sushma 'आहुति' ने कहा…

ए रात की तन्हाईयों , मुझको लगा लो सीने से |
डर लगता है अब , ख़ामोशी भरे इस मंजर से |खुबसूरत और कोमल भावो की अभिवयक्ति....

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 05-12-2011 को सोमवारीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

aap itini acchhi gazal likhti hain bahut khushi aur hairani hoti hai.

bahut bahut badhayi.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 04 -12 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में आज .जोर का झटका धीरे से लगा

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 04 -12 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में आज .जोर का झटका धीरे से लगा

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

चांदनी रात जो है तो , ख़ामोशी अच्छी नहीं लगती |
तारों से कुछ देर और , ठहर जाने की मोहलत ले लो |

खूबसूरत रचना ... गहन अभिव्यक्ति

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

लोग कहते हैं दीवाना , इस पर भी यकीं करने दो |
न रहे तमन्ना अधूरी , उस पल से भी गुजरने दो |

बहुत ही बढ़िया।

सादर

babanpandey ने कहा…

kya baat hai ..umda

Reena Maurya ने कहा…

gahare bhavo ko prakat karati ati sundar rachana hai...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

लोग कहते हैं दीवाना , इस पर भी यकीं करने दो |
न रहे तमन्ना अधूरी , उस पल से भी गुजरने दो |

अच्छी रचना...
सादर...

Kailash C Sharma ने कहा…

जुदाई का है आलम तो , जुदाई का ही मंजर होगा |
है इतनी गुजारिश , सह लेने तक की हिम्मत दो |

....बेहतरीन प्रस्तुति...

Rakesh Kumar ने कहा…

चांदनी रात जो है तो,ख़ामोशी अच्छी नहीं लगती |
तारों से कुछ देर और,ठहर जाने की मोहलत ले लो |

वाह! बेहतरीन,लाजबाब ,अनुपम प्रस्तुति.

संगीता जी की हलचल से आना बहुत सार्थक रहा.

मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
इंतजार है आपका.

Sadhana Vaid ने कहा…

वो चाहता है हमें , ये बात जो वो दावे से कहता है |
दो दर्द ऐसा , अहसासे बयाँ को महसूस करने दो |

बहुत खूबसूरत रचना है मीनाक्षी जी ! हर शेर मन को छू कर स्पंदित करता है ! बहुत सुन्दर !

"जाटदेवता" संदीप पवाँर ने कहा…

अच्छे शब्द

knkayastha ने कहा…

है आग मुझमे भडकने की , कहाँ है इंकार हमें |
न दो हवा इतनी , चलो अब थोडा सँभलने दो |
वस्ल की रात है , राहत से बसर अब होने दो |
न रहे गिला कोई , धमकी का असर भी होने दो |
अच्छी रचना... क्या कहने!!!

ana ने कहा…

kay kahane...bahut achchhi prastuti

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

bahut hi behtareen gazal vaki mja aa gyaa... thanks

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जुदाई का है आलम तो , जुदाई का ही मंजर होगा
है इतनी गुजारिश , सह लेने तक की हिम्मत दो ..

बहुत खूब .. इस जुदाई को सहना आसान नहीं ...