देखो होंसला न खोना


कितनी अजीब होती है जिंदगी
जहाँ  पल कि खबर नहीं
एक धमाका , दूसरा धमाका
और एक पल में ही इंसा ...
इंसा से दूर |
चारों तरफ दहशत ही दहशत
एक चीरता हुआ सा सन्नाटा
उसके बाद कभी न खत्म होने वाली
आह , दर्द , छटपटाहट
जो पूरी जिंदगी भर साथ रहती है |
कितना होंसला है उनके ज़ज्बों में
जो कभी हिम्मत नहीं हारते
अपने सफर कि गति
वो कभी नहीं खोते |
अपनी जिंदगी को
फिर से नया मोड  देकर
उसी प्रवाह से आगे बढते जाते हैं |
वहीँ दूसरी तरफ
कितने खुदगर्ज़ हैं वो इंसा
जो इंसा होकर भी
इंसा के दर्द को नहीं समझते ,
उनकी भावनाओं से उनका
कोई सरोकार ही नहीं ?
न जाने क्यु मर जाता है
उनका जमीर
जो खुद इंसा होकर
उनका लहू बहा देते हैं
और पछतावा फिर भी नहीं |
क्या उनमें  एहसास कि कमी ?
क्या उनमें मानवता का अंत ?
या कोई बैचेनी ?
सवाल तो बहुत हैं
पर जवाब किसी का भी नहीं
पर इंसा का होंसला
फिर भी बुलंद
जिससे उनका एक दूसरे से
जुड़े रहने का सिलसिला
अब भी बरकरार
ये होंसला बने रहे
और जीवन युहीं
चलता रहे |

20 टिप्‍पणियां:

sushma 'आहुति' ने कहा…

देखो हौसला न खोना... बिलकुल सही कहा आपने....

निर्मला कपिला ने कहा…

बिलकुल सही कहा। शुभकामनायें।

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

बिलकुल सही कहा आपने....

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

ye housla rahe buland...
beshak jaan jaye......
par kab tak!!
behtareen rachna...meenakshi!

P.N. Subramanian ने कहा…

सुन्दर रचना. ज़िन्दगी यों ही चलती रहेगी.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 28 - 07- 2011 को यहाँ भी है

नयी पुरानी हल चल में आज- खामोशी भी कह देती है सारी बातें -

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत अच्छा सन्देश देती अच्छी रचना

सागर ने कहा…

सकरात्मक उर्जा देती रचना....

वीना ने कहा…

एकदम सही कहा....

anu ने कहा…

बहुत सार्थक रचना है आपकी

जीवन नाम है चलने का ....रुकने को
मौत कहते है
आतंकी साये में जीने वाले भी
खुद को जिन्दा ही मानते है ......आभार
--

anu

पाती नेह भरी ने कहा…

सवाल तो बहुत हैं
पर जवाब किसी का भी नहीं
पर इंसा का होंसला
फिर भी बुलंद
जिससे उनका एक दूसरे से
जुड़े रहने का सिलसिला
अब भी बरकरार
ये होंसला बने रहे
और जीवन युहीं
चलता रहे |

Bahut Khoob!

Sadhuvaad!

mahendra srivastava ने कहा…

हर बार की तरह इस बार भी बहुत खूबसूरत रचना।

कितने खुदगर्ज़ हैं वो इंसा
जो इंसा होकर भी
इंसा के दर्द को नहीं समझते ,
उनकी भावनाओं से उनका
कोई सरोकार ही नहीं ?
न जाने क्यु मर जाता है
उनका जमीर

बहुत बहुत शुभकामनाएं

mahendra srivastava ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Roshi ने कहा…

ek ek shabd sahi hai....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दुख आयेंगे, सह जायेंगे।

नीरज जाट ने कहा…

बहुत बढिया प्रस्तुति

vidhya ने कहा…

सुन्दर रचना.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

पता नहीं इंसान को क्या हो जाता है ... कुछ सिरफिरों की वजह से मानवता बदनाम होती है ... वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इन बातों को नाकाम करने की कोशिशों में लगे रहते हैं ... अच्छी रचना है ..

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच

S.M.HABIB ने कहा…

ये होंसला बने रहे
और जीवन युहीं
चलता रहे |
सुन्दर रचना...
सादर...