सिर्फ तेरी रहमत


हाँ हम जानते हैं सारी सृष्टि में ही तो बसी वफाएं है |
पर जो लिखा खुदा ने वही किस्मत हम साथ लाए हैं |

खुद अपनी चाहत से पैदा की है हमने अपनी वफाएं हैं  |
किसी के कुछ करने से नहीं बदलती तकदीरें जफ़ाएं हैं |

बदलते हुए हर मौसम को हमें खुद ही झेलना होगा |
खुशी - गम के साये में हमें खुद जीना - मरना होगा |

कौन  किसी की खातिर  कब जीया कब मरा  होगा ?
ये तो बस एक एहसास ही है जो उसने कह दिया होगा |

कोई भी धर्म कब किसी से कोई  गुनाह को कहती है |
ये तो इंसा की सोच है जो  ये सब करने को कहती है |

मैं जब तुझसे  हूँ तो क्यु करूँ मैं तुझसे कोई बेवफाई  |
फिर आप हमसे ये कहें कि दोस्त तू तो बड़ा है सौदाई  |

इंसा होके अगर इंसा के दर्द को हम ही न जान पाएंगे |
 होगा खफा खुदा जब इस जहाँ से ऐसे  रुखसत हो जायेंगे |

उसके  गुलिस्तान के ही हम सब फूल - पत्ते हैं |
उसके ही कर्म से सूरज - चाँद बेबाक चमकते  हैं |

वो बदलता है नसीबों को और हम खुद पर रश्क करते हैं |
बड़े जालिम हैं हम जो उसकी रजा से बेखबर से रहते हैं |

13 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

उसके गुलिस्तान के ही हम सब फूल - पत्ते हैं |
उसके ही कर्म से सूरज - चाँद बेबाक चमकते हैं |

बहुत सही।

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कल 27/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

वन्दना ने कहा…

हाँ हम जानते हैं सारी सृष्टि में ही तो बसी वफाएं है |
पर जो लिखा खुदा ने वही किस्मत हम साथ लाए हैं |कोई भी धर्म कब किसी से कोई गुनाह को कहती है |
ये तो इंसा की सोच है जो ये सब करने को कहती है |

वाह …………बेहतरीन अल्फ़ाज़ के साथ शानदार अभिव्यक्ति।

वन्दना ने कहा…

आपकी रचना आज तेताला पर भी है ज़रा इधर भी नज़र घुमाइये
http://tetalaa.blogspot.com/

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ...बेहतरीन प्रस्‍तुति के लिये आभार ।

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

kuchh to aisa hai ki aapki rachna ko nayee purani halchal aur tetala dono pe share kiya ja raha hai..:)

prerna argal ने कहा…

बहुत सुंदर भाव लिए बेमिसाल रचना ,अच्छे और सुंदर शब्दों का चयन /बहुत बहुत बधाई आपको

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

har baar ki tarah is baar bhi bahut sundar rachna

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत पेशकश ... अच्छी लगी आपकी रचना

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सबकी अपनी धरती, सबका अपना आसमान।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा!!!

Dorothy ने कहा…

बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.

sushma 'आहुति' ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुती...

vishy ने कहा…

sundar

लिकं हैhttp://bachpan ke din-vishy.blogspot.com/
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