अँधेरी रात का साया


वो गुनगुनाती  गज़ल , वो मदहोश  रातें  |
तेरे - मेरे मिलन की , वो दिलकश बातें   |

न तुमने कहा और , न कुछ हम कह सके |
ख़ामोशी में गुजरी , तमाम रगिन सदाएं  |

सोचा था रात का , हर एक लम्हा चुरालूं  |
उसको पिरोकर फिर , एक गजरा बनाऊं |

तेरे गेसुओं को , महकते फूलों से सजाकर |
हो जाऊं फ़िदा , फिर तेरी हरएक अदा पर  |

पर रात के अँधेरे  ने , मंजर ऐसा बना दिया |
मेरे - तेरे दरमियाँ कोई , आके था ठहर गया |

पलक उठाके  मैंने , उसका दीदार जो किया |
वो कोई और नहीं , वो तो साया था  चाँद का |

वो हादसा जहन में , मेरे कुछ ऐसे उतर गया |
चांद तो चला गया , पर वक्त वही ठहर गया |

अब तक भी न , मुझसे  वो पल संवर सका |
वही बेकरार रातें और चांदनी का संग मिला |

21 टिप्‍पणियां:

Rajput ने कहा…

सोचा था रात का , हर एक लम्हा चुरालूं |
उसको पिरोकर फिर , एक गजरा बनाऊं |

बेहतरीन पंक्तिया .

संध्या शर्मा ने कहा…

वो हादसा जहन में , मेरे कुछ ऐसे उतर गया |
चांद तो चला गया , पर वक्त वही ठहर गया |
bahut khoob.......

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

wah!

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

क्या कहने, बहुत सुंदर


सोचा था रात का , हर एक लम्हा चुरालूं |
उसको पिरोकर फिर , एक गजरा बनाऊं |

तेरे गेसुओं को , महकते फूलों से सजाकर |
हो जाऊं फ़िदा , फिर तेरी हरएक अदा पर |

knkayastha ने कहा…

पलक उठाके मैंने , उसका दीदार जो किया |
वो कोई और नहीं , वो तो साया था चाँद का |

वाह क्या कहने.... हरेक शेर शानदार है...

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुन्दर एवं लयबद्ध !

Jyoti Mishra ने कहा…

awesome lines..
always a fun to read wat u write !!

Always Unlucky ने कहा…

हर बार यहाँ आके सोचता हूँ की कोई पढूंगा पर कोई टिपण्णी नहीं डालूँगा पर फिर से इतनी खुबसूरत रचना की विवस हूँ आपको धन्यवाद् कहने के लिए, धन्यवाद् From Great talent

sushma 'आहुति' ने कहा…

वो गुनगुनाती गज़ल , वो मदहोश रातें |
तेरे - मेरे मिलन की , वो दिलकश बातें |वाह! बहुत खुबसूरत एहसास पिरोये है अपने......

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

वो हादसा जहन में , मेरे कुछ ऐसे उतर गया |
चांद तो चला गया , पर वक्त वही ठहर गया |

समय रुका था स्मृति बनकर,
भावों को बह जाने दें।

मदन शर्मा ने कहा…

बहुत अच्छी बात कही आपने...शुभकामनाएँ!

vidya ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना...आपका ब्लॉग फोलो करके खुशी हुई...

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

sundar

सागर ने कहा…

behtreen prstuti..........

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

कल १७-१२-२०११ को आपकी कोई पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

संतोष कुमार ने कहा…

वाह !
सुंदर रचना ...
बधाई !!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

वो हादसा जहन में , मेरे कुछ ऐसे उतर गया |
चांद तो चला गया , पर वक्त वही ठहर गया |

क्या बात है ...वाह!


सादर

Prakash Jain ने कहा…

बहुत सुंदर....

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S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

शानदार अशआर...
सादर बधाई...

***Punam*** ने कहा…

महकती...मदमाती...
सुन्दर और प्यारी सी रचना....

Reena Maurya ने कहा…

अब तक भी न , मुझसे वो पल संवर सका |
वही बेकरार रातें और चांदनी का संग मिला |
बहुत बेहतरीन रचना...