कुछ अनसुलझे से पहलु



रुक ... थोडा ठहर |
ओ ... उड़ते हुए बादल |
सवालों में उलझे अनसुलझे , 
पहलुओं को सुलझा जा |
किस शर्त पर , आसमां के सीने में
तू अठखेलियाँ करता ?
किस चाहत से , अक्सर
धरा की तू , प्यास बुझाता ?
जमीं पर तो हमने कोई ऐसा ...
इंसा नहीं देखा |
बिना शर्त के कोई किसी को ,
हो अपनाता |
पर तू ... झूठी उम्मीद से ही
एक बार मेरे आँगन में उतरना |
मुंडेर में रखे उस लिफाफे को
अपने साथ ले चलना |
कुछ खास नहीं ...
अनसुलझे से कुछ सवाल हैं उसमे |
अक्सर तकलीफ देते हैं ,
जब सवालों के घेरे में लेते हैं |

36 टिप्‍पणियां:

Dheerendra singh Bhadauriya ने कहा…

अनसुलझे से कुछ सवाल अक्सर तकलीफ देते हैं ,

मीनाक्षी जी,,,कभी तो मेरे पोस्ट आइये,स्वागत है,,,

MY RECENT POST: माँ,,,

Ramakant Singh ने कहा…

जमीं पर तो हमने कोई ऐसा ...
इंसा नहीं देखा |
बिना शर्त के कोई किसी को ,
हो अपनाता |

शर्तों पर ज़िन्दगी नहीं जी सकते बहुत कठिन है ..

रश्मि प्रभा... ने कहा…

http://bulletinofblog.blogspot.in/2012/10/5.html

Ramakant Singh ने कहा…

किस शर्त पर , आसमां के सीने में
तू अठखेलियाँ करता ?

दिल में उतर जानेवाली भावनाओं को प्रस्तुति देती .

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जीवन के अनलुलझे पहलुओं को सुलझाते चलना होगा । इतना अधिक भार रख कर अधिक चला भी तो नहीं जा सकता है ।

सतीश सक्सेना ने कहा…

सत्य कठोर होता है ...
शुभकामनायें आपको !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

वाह...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (14-10-2012) के चर्चा मंच पर भी की गई है!
सूचनार्थ!

रविकर ने कहा…

बहुत बढ़िया |
बधाई ||

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…


किस शर्त पर , आसमां के सीने में
तू अठखेलियाँ करता ?
किस चाहत से , अक्सर
धरा की तू , प्यास बुझाता ?
जमीं पर तो हमने कोई ऐसा ...
इंसा नहीं देखा

बहुत सुंदर रचना
क्या बात

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

सवाल बहुत है ...पर उत्तर कम ...और वही दर्द को परिभाषित कर जाते हैं

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत २ शुक्रिया धीरेन्द्र सिंह जी :)

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत २ बहुत शुक्रिया रमाकांत सिंह जी |

Minakshi Pant ने कहा…

रश्मि दी सिर्फ लिंक कोई कमेन्ट नहीं :) बहुत बहुत शुक्रिया दी आप मेरे ब्लॉग में आई आभार |

Minakshi Pant ने कहा…

सच कहा प्रवीन जी पर क्या करे न चले भी तो कहाँ जाएँ और जब तक जिन्दगी ये अनसुलझे सवाल तो सर उठाते ही रहेंगे फिर घबराना कैसा |बहुत २ शुक्रिया प्रवीण जी |

Minakshi Pant ने कहा…

सच कहा प्रवीन जी पर क्या करे न चले भी तो कहाँ जाएँ और जब तक जिन्दगी ये अनसुलझे सवाल तो सर उठाते ही रहेंगे फिर घबराना कैसा |बहुत २ शुक्रिया प्रवीण जी |

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत वक्त बाद हमारे ब्लॉग में आप दिखे सतीश जी हमारा उत्साह बढ़ाते रहने का तहे दिल से शुक्रिया |

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत वक्त बाद हमारे ब्लॉग में आप दिखे सतीश जी हमारा उत्साह बढ़ाते रहने का तहे दिल से शुक्रिया |

Minakshi Pant ने कहा…

आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी मैं आपकी तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ की आपने मुझे चर्चा मंच में एक बार फिर से आमंत्रित कर मेरा उत्साहवर्धन किया है मैं आपकी बहुत शुक्रगुजार हूँ |

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत २ शुक्रिया रविकर जी |

Minakshi Pant ने कहा…

महेन्द्र श्रीवास्तव जी मैं आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहूंगी आपने हर बार मेरे उत्साह को कायम रखने में मेरी मदद की है एक बार फिर से आपका शुक्रिया |

Minakshi Pant ने कहा…

मेरा उत्साह बढाने में आपका भी बहुत बड़ा हाथ है मैं आपका दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ बहुत २ शुक्रिया |

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज 14-10-12 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....

.... आज की वार्ता में ... हमारे यहाँ सातवाँ कब आएगा ? इतना मजबूत सिलेण्डर लीक हुआ तो कैसे ? ..........ब्लॉग 4 वार्ता ... संगीता स्वरूप.

Arvind Jangid ने कहा…

दिल को छू गयी रचना...आभार

Devendra Dutta Mishra ने कहा…

गहरा अतर्मन का चिंतन।सुंदर प्रस्तुति।

काव्य संसार ने कहा…

बहुत उम्दा रचना |

इस समूहिक ब्लॉग में आए और हमसे जुड़ें :- काव्य का संसार

यहाँ भी आयें:- ओ कलम !!

Minakshi Pant ने कहा…

संगीता स्वरुप दीदी जी आपके इस तरह बार - २ मेरा उत्साहवर्धन की मैं बहुत शुक्रगुजार हूँ आपका अपने ब्लॉग पर आना मेरा उत्साह बढाता है मैं आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ |

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत - बहुत शुक्रिया Arvind Jangid जी मेरे ब्लॉग में आकर मेरी हिम्मत बढ़ाने का शुक्रिया |

Minakshi Pant ने कहा…

Devendra Dutta Mishra जी आपने मेरी रचना में लिखे भावों को समझा इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया |

Minakshi Pant ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Minakshi Pant ने कहा…

काव्य संसार आपने मेरा उत्साहवर्धन कर मुझे और आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया है इसके लिए दिल से शुक्रिया |

expression ने कहा…

आएगा ज़रूर वो बादल...
लाएगा एक टुकड़ा इन्द्रधनुष भी अपने साथ...
:-)

सादर
अनु

Maheshwari kaneri ने कहा…

किस शर्त पर , आसमां के सीने में
तू अठखेलियाँ करता ?....बहुत सुन्दर मीनाक्षी जी..कभी मेरी पोस्ट में आइये,स्वागत है,,,

Prakash Jain ने कहा…

जमीं पर तो हमने कोई ऐसा ...
इंसा नहीं देखा |
बिना शर्त के कोई किसी को ,
हो अपनाता |
पर तू ... झूठी उम्मीद से ही
एक बार मेरे आँगन में उतरना |

Bahut sundar bhaav...:-)

Aziz Jaunpuri ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति "ज़िन्दगी शर्तों की स्याही में घुल गयी,वो भी पहली ही बारिस में धुल गई,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Aziz Jaunpuri ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति "ज़िन्दगी शर्तों की स्याही में घुल गयी,वो भी पहली ही बारिस में धुल गई,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही भावनामई रचना.बहुत बधाई आपको