वो एक पगली

Photo: वो एक पगली 

वो दिन भर बातें करती थी ... 
कुछ चुपके - चुपके कहती थी |
मेरी सांसों में भी अक्सर ...
उसकी भीनी सी खुशबु मिलती थी |
आने वाली हर आहट ...
वक़्त - बेवक्त जगा कर जाती थी |
वो दूर बहुत दूर रहकर भी 
अहसास जगा फिर जाती थी |
दिन रात वो ख्वाब सजाती थी ...
मुझसे कहने को घबराती थी |
वो जान से मुझको प्यारी थी ...
पर मुझसे वो कतराती थी |
न वक़्त कभी ऐसा आया ...
मैं उससे न फिर मिल पाया |
वो साया बनकर , मेरे साथ...
दिन - रात सफर में रहती थी | 
आँखे अब जब नम होती है ...
उसकी यादें संग होती है |
वो पगली मेरे ख्वाबों की ...
अक्सर शहजादी होती थी |

वो दिन - भर बातें करती थी ... 
कुछ चुपके - चुपके कहती थी |
मेरी सांसों में हरपल उसकी 
भीनी सी खुशबु रहती थी |
आने वाली ... हर आहट ...
उसकी याद दिलाती थी |
वो दुरी हमसे रखकर भी
अहसास जगाकर जाती थी |
दिन - रात वो ख्वाब सजाती थी ...
बस कहने से घबराती थी |
वो जान से मुझको प्यारी थी ...
पर मुझसे वो कतराती थी |
न वक़्त कभी ऐसा आया ...
मैं उससे न था  मिल पाया |
वो साया बनकर , साथ मेरे ...
दिन - रात सफर में रहती थी |
आँखे जब भी नम होती थी  ...
उसकी यादें संग होती थी  |
वो पगली मेरे ख्वाबों की ...
अक्सर शहजादी होती थी  |

10 टिप्‍पणियां:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

वाह! वाह! क्या बात है!!!

निहार रंजन ने कहा…

बहुत सुन्दर.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार (21-04-2013) के अब और नहीं सहेंगे : चर्चा मंच 1221 (मयंक का कोना) पर भी होगी!
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!
सूचनार्थ...सादर!

Reena Maurya ने कहा…

बहुत सुन्दर प्यारी रचना...
बेहतरीन...
:-)

सरिता भाटिया ने कहा…

बहुत खूब मिनाक्षी जी
http://guzarish6688.blogspot.in/2012/12/blog-post_31.html

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,प्यारी रचना,,,

RECENT POST : प्यार में दर्द है,

राकेश कौशिक ने कहा…

वो पगली मेरे ख्वाबों की ...
अक्सर शहजादी होती थी |

अति सुंदर

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

भीनी - भीनी सी बातें ........

sushma 'आहुति' ने कहा…

भावो को संजोये रचना......

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

beautiful composition.