प्यार का अंदाज़


जिसने इश्क  किया ..........
         वो भला केसे न जानेगा !
इसमें बनते बिगड़ते रंग
         वो क्यु न पहचानेगा !
इश्क  मै मिले अवसाद..........
        का स्वाद केसा होता है !
दर्द भी जब आँखों से बहें.....
        तो उसमे भी प्यार होता है !
हर पल उसके इंतजार मै ......
          दिन गुलजार होता है !
हर पल उसे पाने की चाह मै ......
       अपना ख्याल ही कहाँ होता है !
पर आज के युग मै ........
     प्यार ने कुच्छ एसी करवट ली है !
उसके प्यार का अंदाज़ .....
          कुच्छ इस कदर निराला है !
थोड़े ही दिनों मै प्यार तो ..............
            रफूचक्कर ही हो जाता है !
जेसे की किसी फिल्म  का शाट........
            पल भर मै खत्म हो जाता है !

3 टिप्‍पणियां:

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

minakshiji,
sarvpratham blog par aane ke liye bahut bahut dhnyvaad,

aapke pyar ka andaaj bahut hi niraala hai,
bahut bahut badhai, in sundar panktiyon ke liye

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

ab main aapko follow kar raha hoon

anu ने कहा…

बहुत सुंदर रचना .....