
आज ही फ़ूड रिलीफ ओर्ग के बारे मै पढ़ रही थी ये संस्था 6000 एसे गरीब राज्यों की मदद करते हैं जो गरीबी रेखा से
नीचे है जिनके पास कमाई का कोई साधन नहीं जेसे बाड पीड़ित देश उड़ीसा , आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडू जहां पर लोगों के पास खाने के लिए भोजन की भी उपलब्धता नहीं है वो इन राज्यों मै बच्चों के खाने पीने की व्यवस्था साथ साथ इन स्चूलों मै बच्चों के स्कूल जाने की व्यवस्था भी की जाती हैं ! जिससे देश के बच्चे
आगे बढ सकें और अपने भविष्य को संवारने मै उन्हें मदद मिल सके !
तो इससे साफ़ जाहिर है की हमे अपने जीवन को दिशा देने की जरूरत है की हम क्या करना चाहते हैं अगर हम दिल मै ठान ले तो कोई भी काम मुश्किल हो ही नहीं सकता एक बार हिम्मत से कदम आगे बड़ाने की देर है रास्ते खुद बखुद खुलते चले जाते हैं हम क्यु हर वक़्त इस बात का गुणगान करते रहें की उसने एसा किया उसने वेसा किया एसा करने से तो उसको और बल मिलेगा की एसा करने से तो मै चर्चा मै हूँ अगर एसा नहीं करूंगा लोग
मुझे पूछेंगे भी नहीं मुझे जानेगे ही नहीं बल्कि हमे तो उस व्यक्ति
को उठाना चाहिए जो देश के लिए अच्छे काम करके दुसरो को
उपर उठा रहा हो एसे लोगों को प्रोत्साहित करते रहने से उन्हें बल
मिलेगा और वो इसे और आगे ले जाने मै सफल होंगे ! क्युकी
इन्सान हर वक़्त किसी न किसी विवाद मै घिरे रहना चाहता है
जब गलत काम करने वाले को किसी तरह की प्रतिक्रिया ही नहीं
मिलेगी तो वो उस बात को सोचने के लिए विवश जरुर हो जायेगा
की अब मै एसा क्या करू जिससे मै फिर से उनकी नज़रों मै
आ सकूँ और जब गलत काम करने वाला इन्सान सोचेगा और
अपने काम को अच्छे करने वालों से जोड़ेगा तो हो सकता है वो
भी कुछ अच्छा करने के बारे मै सोचने लगे ?
Randiya is a very poor rural उड़ीसा ... ये हमारे देश का एसा गरीब देश है जहां लोगों के पास दो वक़्त का खाना भी नसीब नहीं होता पर संस्था की मदद से इन लोगों को जीने का सहारा मिल रहा है इनके अन्दर इंसानियत का जज्बा बना हुआ है की इन्सान अगर बुरा है तो उसके सीने मै भी दिल धडकता है वो भी इंसानियत को पहचानता है ! कुछ साल पहले तक आश्रम 300 गरीब बच्चों को भोजन वितरण करती थी पर 2007 तक कुछ अच्छे
लोगों की मदद से इसकी संख्यां 44 . ००० तक हो गई थी और आज इसकी संख्या मै यक़ीनन और इज़ाफा हुआ होगा ! तो गरीबी अगर गरीबों के लिए अभिशाप भी है तो क्या हुआ इसे वरदान बनाने मै थोड़ी बहुत भूमिका हम और आप भी निभा ही सकते हैं कुछ और नहीं तो हम उन लोगों का उत्साह तो बड़ा ही सकते हैं जो इतनी मेहनत से इस काम को अंजाम देने मै पूरी तल्लीनता से जुड़े हुए हैं ,जबकि इन तक तो मिडिया भी कोई कार्यवाही नहीं करती फिर भी बिना किसी प्रशंशा पाने के लालच के बावजूद बिना किस स्वार्थ के ये लोग अपने काम को अंजाम दे रहें हैं क्युकी गरीबों के लिए कोई क्या कर रहा है उससे किसी को क्या मिलने वाला है वो खा रहें हैं या नहीं उससे मिडिया को क्या मिलने वाला
है उन्हें तो चटपटी खबरों से मतलब है जो आज की दुनिया पसंद करती है उन्होंने भी पेट पालना है भाई ? इसमें उनका भी कोई कसूर नहीं है क्युकी वो भी उसी तरफ का रुख करती है जहां दुनिया का रुझान होता है और यही वजह है की जहां - जहां मिडिया पहुँचती है उस जगह एसी हवा फेलती है की वो बढती चली जाती है और जहां ये नहीं पहुँचती वहां किसी की नज़र ही नहीं जाती और वहां की जनता को आगे बड़ने का कोई साधन ही नही मिलता और वहां चिंगारी तो उठती है पर वही बुझकर रह जाती है क्युकी चिंगारी को ज्वाला बनाने के लिए हवा भी जरुरी है !
7 टिप्पणियां:
बहुत ही अच्छा और विचारणीय आलेख.
सादर
vicharniy
हम सब गरीबों की यथासंभव मदद करके
इंसानियत को बल दे सकते हैं |
वास्तविकता के बेहद करीब नहीं बल्कि बिलकुल वास्तविक ...विचारणीय....वक़्त की नजाकत पर करार तमाचा है ...आपका आलेख ...आपका आभार मीनाक्षी जी ..
विचारणीय और चिन्तनीय।
vicharottejak lekh...!
विचारणीय आलेख
कुछ दिनों से बाहर होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका
माफ़ी चाहता हूँ
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