परिचय

ये जो आसमां  में बादलों के साये हैं |
धरा से आसमां  में किस कदर ये छाए हैं |
कितने  हक से दोनों जहाँ में रहते हैं |
बरसते तो हैं  ये  उमड़ - घुमड़   के ,
फिर उनके ही दामन से लिपट जाते हैं |
कैसा  रिश्ता है आपस में दोनों का इस कदर
बिछुड़ने पर भी हर बार मिलने को ये तरसते हैं |
गरजते  हैं बरसते हैं , न जाने एक दूजे से
क्या ये कहते हैं |
फिर भी एक ही  आशियाँ में जाके साथ  रहते हैं |
धरा  की प्यास ये  बुझाते  हैं |
प्रकृति को हरा - भरा  बनाते है |
सारी सृष्टि को नया जीवन दे कर...
निस्वार्थ भाव... अपना परिचय बतलाते हैं |
कई - कई बार इस कदर खुद को मिटाते हैं
फिर उसी आस्तिव को पाने  उसी रूप में आ जाते हैं |


17 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर ने कहा…

बहुत अच्छा लगा पढ़ कर.

सादर

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

parichay padkar achchha laga

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'कैसा रिश्ता है आपस में

दोनों का इस कदर कि

बिछुड़ने पर भी हर बार

मिलने को ये तरसते हैं '

यही तो है अमर प्रेम.......भावपूर्ण सुन्दर रचना

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पृथ्वी को रह रह कर अपना अस्तित्व याद दिलाने आ जाते हैं ये बादल।

Rahul Singh ने कहा…

खूब पहचानी आपने रिश्‍तों की घनिष्‍ठता.

OM KASHYAP ने कहा…

Bahut sunder parichay
lajawab
aabhar........

amrendra "amar" ने कहा…

भावपूर्ण सुन्दर रचना

Manpreet Kaur ने कहा…

bouth he aache shabad nice blog
visit plz friends...
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Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (05.03.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत खूब...शुभकामनायें !!

nivedita ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति ....

mridula pradhan ने कहा…

bahut achchi lagi.

Dr Varsha Singh ने कहा…

कैसा रिश्ता है आपस में
दोनों का इस कदर की ,
बिछुड़ने पर भी हर बार
मिलने को ये तरसते हैं |
गरजते हैं बरसते हैं |
न जाने एक दूजे से
क्या ये कहते हैं ...

मनोभावों को खूबसूरती से पिरोया है। बधाई।

Minakshi Pant ने कहा…

aap sabhi ko shukriya doston

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

भावनाओं का बहुत सुंदर चित्रण . ...बधाई

सदा ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर ..भावमय करते शब्‍द ।

Kailash C Sharma ने कहा…

कई - कई बार इस कदर
ये खुद को मिटाते हैं
पर फिर से उसी आस्तिव
को पाने उसी रूप में
आ जाते हैं |

बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना..