विचारों का द्वन्द

 

जिंदगी क्या है ?
सबका अपना - अपना नजरिया है |
किसी के लिए खुद के वास्ते
जीना ही जिंदगी का मकसद है ,
तो कोई अपनों कि खुशी में ही
अपने जीवन को जिए जा रहा है  |
किसी का बुलंदियों को पाना
ही अगर एक  अभिलाषा है ,
तो कुछ को खुद को मिटा के जीने
में ही  मज़ा आ रहा  है  |
किसी का देश प्रेम ही है सब कुछ ,
तो कोई दर्द देकर ही खुश हो रहा है  |
कोई अपनी कला को ही जीवन मान रहा है ,
तो कोई धर्म के नाम पर ही जश्न मना रहा है  |
कुछ सबको अपना बनाके जीवन जिए जा रहा है |
तो कोई खुद को  सबसे  दूर  लिए जा रहा है |
अब अगर जीने के इतने रूप कहलाते है |
तो बोलो हम सबके साथ खुश कहाँ  रह पाते है ?
सबका ही तो अपने विचारों का द्वन्द है |
अजी जीने दो सबको जो स्वछंद है |
तभी प्रगति का भी इसमें जुड़ा एक अंश है |
थोडा संयम से चलने भर का श्रम है |
बाकि अपना देश तो सबसे अहम है |


14 टिप्‍पणियां:

वन्दना ने कहा…

बिल्कुल सही कहा सबसे अहम देश है उसके बाद और कुछ्।

mahendra srivastava ने कहा…

सच है
जिंदगी क्या है
सबका अपना अपना नजरिया है

बिल्कुल सही, अच्छी रचना

शुभकामनाएं

babanpandey ने कहा…

पुरे समाज को साथ ले कर चलना भी जिंदगी का पहलु हो सकता है

: केवल राम : ने कहा…

कोई अपनी कला को ही जीवन मान रहा है ,
तो कोई धर्म के नाम पर ही जश्न मना रहा है |
कुछ सबको अपना बनाके जीवन जिए जा रहा है |

जिन्दगी के लिए हर किसी का अपना अपना नजरिया है .....लेकिन जिन्दगी का वास्तविक आनंद वही ले पाता है जो जिन्दगी के वास्तविक मायनों को समझता है .....आपका आभार

๑♥!!अक्षय-मन!!♥๑, ने कहा…

waah sathkak shabd aur aapke khyal bahut accha likha hai......

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

हाँ ये सच है कि सबका अपना जीवन है और अपनी अपनी सोच है लेकिन फिर सिर्फ अपने लिए जीना भी कोई जीना है. मनुष्य का शरीर लिया है तो अपने अलावा भी कुछ है जिसके लिए जीना है - देश , समाज और मानवता . इनके बिना मानव होने का अर्थ क्या?

संजय भास्कर ने कहा…

सबका अपना जीवन है और अपनी अपनी सोच है
जय हिंद जय भारत

sushma 'आहुति' ने कहा…

बहुत ही सार्थक....

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

बिल्कुल सही

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

जिन्दगी जीने का है अन्दाज अपना-अपना. शुभकामनाएँ...

PK Sharma ने कहा…

had kar di maapne dost

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अपना आखिर अपना है।

Dr Varsha Singh ने कहा…

थोडा संयम से चलने भर का श्रम है |
बाकि अपना देश तो सबसे अहम है |

आस्था और विश्वास से ओतप्रोत सुन्दर रचना !

Nice_Cox ने कहा…

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