फासले जिंदगी के

 
सोचती हूँ  पलकों में छुपाकर  मैं उसे रख लूँ |
मगर भीनी  महक तो वो साथ लेके चलता है |

मैं आँखे बंद करती हूँ एक चुभन सी होती है |
उस दर्द  से ही वो हरपल मेरे साथ रहता है |

उसे कोई न देखे मैं उसे दिल में छुपाती हूँ |
पर क्या करू आंखे हर राज़  खोल देती है |

जमाना करता है रुसवा मैं आंसू बहाती हूँ |
उसका  एहसास मुझे हिम्मत दिलाता है |

जब भी मैंने चाहा एक प्यारी गज़ल लिखूं |
ख्यालों में उसे रख फिर मैं कलम चलाती हूँ |

वो अपनी कहता है फिर मैं अपनी सुनाती हूँ |
फासले जिंदगी के इस तरह फिर मैं सजाती हूँ |

15 टिप्‍पणियां:

: केवल राम : ने कहा…

वो अपनी कहता है फिर मैं अपनी सुनाती हूँ |
फासले जिंदगी के इस तरह फिर मैं सजाती हूँ |

यह जिन्दगी के नहीं ....विचारों के फासले ....बस यह फासले मिट जाएँ जिन्दगी स्वतः ही करीब आ जाएगी ...!

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

Jyoti Mishra ने कहा…

beauty as well as complexity of life.. beautifully expressed !!
Awesome read :)

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरती से सजा लिए हैं मन के भाव ...फिर फासले कहाँ ?

आशा ने कहा…

भावों की बहुत सुन्दर प्रस्तुति |बधाई
आशा

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

संवाद की डोर से फासले भी कम होने लगते हैं।

mahendra srivastava ने कहा…

वाह जी, बहुत सुंदर। आपको पढना वाकई सुखद है।

जमाना करता है रुसवा मैं आंसू बहाती हूँ |
उसका एहसास मुझे हिम्मत दिलाता है |

sushma 'आहुति' ने कहा…

रोचक रचना....

ZEAL ने कहा…

जमाना करता है रुसवा मैं आंसू बहाती हूँ |
उसका एहसास मुझे हिम्मत दिलाता है |

very natural emotions are beautifully described in this lovely ghazal.

.

Arvind Mishra ने कहा…

सुन्दर अनुभूति की कविता

डॉ. दलसिंगार यादव ने कहा…

@ मैं आँखे बंद करती हूँ एक चुभन सी होती है |
उस दर्द से ही वो हरपल मेरे साथ रहता है |

एक बार फिर यादों ने रुलाया।

सागर ने कहा…

sanvedansheel rachna....

Dorothy ने कहा…

गहन भावाभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बहुत खूबसूरत एहसास...

वो अपनी कहता है फिर मैं अपनी सुनाती हूँ |
फासले जिंदगी के इस तरह फिर मैं सजाती हूँ |

बधाई और शुभकामनाएं.

kumar ने कहा…

उसे कोई न देखे मैं उसे दिल में छुपाती हूँ |
पर क्या करू आंखे हर राज़ खोल देती है |
bahut khub

BASHIR BADR sahab li ek line yad aa gayi
"in aankhon ko ab khaw chupana nahin aata"