सफ़र



यु तो और भी हैं....... ख्वाहिशे
कहे तो कीससे ..............कहे हम !
हर कोई अपनी ही धुन मै है
फरियाद करे तो कीससे ........करे हम !
सबकी मंजिल का  पता अलग है
चले तो किसके ........साथ हम !
अपनी तो मंजिल  सबसे जुदा है
तो फिर क्यु  न...........
तन्हा ही सफ़र........ करे हम !
मिलेगा गर कोई मंजिल मै राही
तो कुच्छ दूर साथ चल पड़ेंगे हम......
बिना मतलब के इंसा को ...
केद तो हरगिज़ ........न करेंगे हम !
साथ रह कर भी तो हर दम .........
तन्हा ही सफ़र.......... करते  है सब !
फिर साथ रख कर किसी को ...
तन्हाई का दर्द........ न दे सकेंगे हम !
 क्यु  न आज से अपनी मंजिल का सफ़र
 खुद ..........ही  तय करे हम !
और अपनी बेचेनी .......का सबब
किसी और से अब  ना कहे हम !

2 टिप्‍पणियां:

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

Taigore ne kaha - yodi tor daak sune kyu na aase tobe aikla chalo re....:)

kaisee tanhai, kaisa gam....

thori galtiyan sudhar len:)...

Minakshi Pant ने कहा…

अपना सुझाव देने का शुक्रिया दोस्त !
वेसे हम खुश रहते हैं और सकारात्मक सोच के साथ जीते हैं !